
पढ़ें खबरों का शिक्षा व्यवस्था पर इम्पैक्ट...
Rajasthan Patrika Impact News: राजस्थान पत्रिका ने हमेशा जनसरोकार के मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर व्यवस्था का ध्यान आकर्षित किया है। जब भी शिक्षकों, विद्यार्थियों, युवा और अभिभावकों से जुड़ी समस्याएं सामने आईं, पत्रिका ने उन्हें प्रमुखता से प्रकाशित किया।
इन खबरों का असर यह रहा कि सरकार और प्रशासन को संज्ञान लेकर ठोस कदम उठाने पड़े और कई लंबित मामलों में निर्णय हुए। पत्रिका की खबरें बदलाव और कार्रवाई की वजह बनती हैं। पाठकों का यह भरोसा पत्रिका ने हमेशा बरकरार रखा है।
अभियानः पत्रिका ने खिलाड़ियों की लंबे समय से अटकी नियुक्ति को लेकर खबर प्रकाशित की।
जयपुर- राजस्थान पत्रिका में खबर प्रकाशित होने के बाद राज्य सरकार ने आउट ऑफ टर्न 137 अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय खिलाड़ियों की नौकरी को हरी झंडी दे दी। इन्हें डीएसपी से लेकर व्याख्याता और कोच बना गया। चयनित शेष खिलाड़ियों को भी जल्द नियुक्ति दी जाएगी।
झालावाड़- राजस्थान पत्रिका ने खुलासा किया कि स्कूलों में कम्प्यूटर अनुदेशकों से दूसरे काम करवाए जा रहे हैं और लैब में सिस्टम धूल फांक रहे हैं, जिसके बाद शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर कम्प्यूटर अनुदेशकों से दूसरे काम करवाए जाने पर रोक लगाई।
जयपुर- पत्रिका ने खबर प्रकाशित की, कि अंतरराष्ट्रीय आर्चर श्यामसुंदर को बिना लिखित सूचना नौकरी से निकाला गया है। उसके बाद खेल सचिव और क्रीड़ा परिषद के अध्यक्ष ने शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर उनकी ट्रेनिंग अवधि को तीन साल बढ़ाए जाने के लिए कहा।
अभियानः पत्रिका ने स्थायीकरण के लिए भटक रहे शिक्षकों की समस्या पर खबर प्रकाशित की।
बांसवाड़ा- पत्रिका में खबर प्रकाशित होने के बाद जिला स्थापना समिति की बैठक में 199 शिक्षकों के स्थायीकरण के आदेश जारी किए गए। ये वे शिक्षक थे, जिनका दो साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी स्थायीकरण नहीं हो पाया था, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा था।
सीकर- पत्रिका में खबर प्रकाशित होने के बाद शिक्षा विभाग ने आरटीई का टाइम फ्रेम जारी किया, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को प्रवेश मिल सके। पत्रिका ने खबर प्रकाशित की थी कि अप्रैल में नया सत्र शुरू होने वाला है, लेकिन आरटीई का टाइम फ्रेम जारी नहीं हुआ है।
डूंगरपुर- पत्रिका ने खबर प्रकाशित की थी कि डूंगरपुर जिले के झौथरी ब्लॉक में बिना आवंटन स्कूलों को नोटिस जारी कर दिया गया। उसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने इसे प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए सीबीईओ को कारण बताओ नोटिस दिया।
अभियानः स्कूल की छत गिरने के बाद पढ़ाई बाधित होने को लेकर कई खबरें प्रकाशित की।
निंबाहेड़ा- पत्रिका की खबर के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया। विभाग ने गांव के ही एक निजी भवन को किराए पर लेकर बच्चों की पढ़ाई की वैकल्पिक व्यवस्था की। साथ ही स्थानीय विधायक श्रीचंद कृपलानी ने नए भवन का निर्माण करवाए जाने के लिए कलक्टर को पत्र भी लिखा।
Published on:
17 Mar 2026 07:58 am
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