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जयपुर के 150 वार्ड में 50 महिला आरक्षित, पुरुष नेता पत्नी को टिकट दिलाने की कर रहे कवायद

जयपुर नगर निगम चुनाव में 150 वार्डों में से 50 महिला आरक्षित होने के बाद टिकट को लेकर सियासत तेज हो गई है। महिला कार्यकर्ताओं की सक्रियता के बीच कई पुरुष नेता अपनी पत्नियों को टिकट दिलाने की कोशिश में जुटे हैं।
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chunav

AI जनरेटेड प्रतीकात्मक तस्वीर

Rajasthan Politics: नगर निगम चुनाव में वार्ड आरक्षण की तस्वीर साफ होते ही टिकट की राजनीति ने नया मोड़ ले लिया है। महिला आरक्षित वार्डों में अब उन महिला कार्यकर्ताओं की दावेदारी को चुनौती मिल रही है जो पिछले पांच साल से लगातार सक्रिय रही हैं। कई वार्डों में पुरुष नेताओं ने अपनी पत्नियों को टिकट दिलाने के लिए लॉबिंग शुरू कर दी है। ऐसे में महिला कार्यकर्ताओं के सामने 'संगठन में सक्रियता बनाम राजनीतिक परिवार का प्रभाव' का सवाल खड़ा हो गया है।

'महिला के नाम पर पुरुष की राजनीति' का सवाल

टिकट की दावेदारी कर रही महिलाओं का कहना है कि यदि महिला आरक्षण का उद्देश्य राजनीतिक भागीदारी बढ़ाना है तो टिकट वितरण में ऐसी महिलाओं को मौका मिलना चाहिए जो स्वयं संगठन और जनता के बीच सक्रिय रही हैं। केवल इसलिए किसी महिला को टिकट देना कि उसके पति की वार्ड में राजनीतिक पकड़ है महिला प्रतिनिधित्व की मूल भावना को कमजोर कर सकता है। इस बार जयपुर में टिकट के लिए बड़ी संख्या में आवेदन भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों को मिले हैं। 150 वार्डों के लिए करीब 5000 दावेदार सामने आए हैं।

स्थानीय पकड़ बनेगी टिकट का आधार

बदले समीकरणों में अब पार्टियां स्थानीय पकड़, सामाजिक समीकरण, बूथ स्तर की स्थिति और जीतने की संभावना को भी टिकट का आधार बना सकती हैं।


दावेदारी करने का अधिकार तो सभी कार्यकर्ताओं को है। लेकिन जिन वार्डों में मजबूत और सक्रिय महिला कार्यकर्ता दावेदार हैं, वहां उन्हीं को टिकट दिए जाएंगे।
अमित गोयल, अध्यक्ष, जयपुर शहर भाजपा

प्रयास सक्रिय महिला नेता-कार्यकर्ता को टिकट देने का रहेगा। जो महिला वर्षों से मेहनत कर रही है उनका अधिकार भी टिकट पर पहला रहेगा।
सुनील शर्मा, अध्यक्ष शहर कांग्रेस जयपुर

पुरुष नेता पत्नी को टिकट दिलाने को कर रहे कवायद

कई वार्डों में महिला कार्यकर्ता लंबे समय से सक्रिय हैं। उन्होंने जनसंपर्क बढ़ाया, स्थानीय समस्याओं को उठाया और पार्टी कार्यक्रमों में भागीदारी की। लेकिन कई वार्डों में पुरुष नेताओं ने अपनी पत्नी को टिकट दिलाने की कवायद शुरू कर दी है। कई महिला दावेदारों का कहना है कि उन्होंने पिछले पांच साल में लगातार वार्ड में काम किया है और जनता के बीच अपनी पहचान बनाई है। ऐसे में सिर्फ राजनीतिक परिवार से जुड़े होने के आधार पर टिकट दिया गया तो उनकी मेहनत और सक्रियता को नजरअंदाज किया जाएगा। अब टिकट वितरण में पार्टी नेतृत्व किसे प्राथमिकता देता है, इस पर सभी की नजर है।