
राजस्थान में निकाय चुनाव की तैयारी तेज। Photo: AI
सुनील सिंह सिसोदिया
जयपुर। नगरीय निकाय चुनाव इस बार सिर्फ भाजपा-कांग्रेस के बीच मुकाबला नहीं रहने वाला, बल्कि टिकट की होड़ और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के चलते कई वार्डों में बहुकोणीय संघर्ष के आसार है। युवाओं को टिकट देने की राजनीतिक दलों की कवायद ने दावेदारों की संख्या बढ़ा दी है। टिकट नहीं मिलने पर बड़ी संख्या में बागी और निर्दलीय मैदान में उतर सकते हैं। पिछले चुनाव में औसतन एक वार्ड में चार से कम उम्मीदवार थे, जबकि इस बार यह संख्या पांच तक पहुंचने का अनुमान है।
राजस्थान में निकायों की संख्या 196 से बढ़कर 309 और वार्ड 7,500 से बढ़कर 10,245 होने से चुनावी मैदान भी करीब डेढ़ गुना बड़ा हो गया है। पिछले निकाय चुनाव में 9,972 महिलाएं मैदान में उतरी थीं। इस बार महिलाओं को भी अधिक प्रतिनिधित्व देने की कोशिश हो रही है। ऐसे में महिलाओं की संख्या पिछली बार के मुकाबले बढ़ने की संभावना है। आरक्षित वार्डों के साथ सामान्य वार्डों में भी महिलाएं टिकट के लिए सक्रिय है।
भाजपा और कांग्रेस समेत राजनीतिक दल युवाओं को चुनावी मैदान में उतारने पर जोर दे रहे हैं। इससे पहली बार चुनाव लड़ने वाले युवा दावेदार बड़ी संख्या में टिकट मांग रहे हैं। टिकट वितरण के बाद जिन दावेदारों की उम्मीद टूटेगी, उनमें से कई निर्दलीय या बागी उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतर सकते हैं। यही वजह है कि इस बार एक-एक वार्ड में मुकाबला पिछले चुनाव के मुकाबले ज्यादा दिलचस्प रहने की संभावना है।
तीसरे मोर्चे में बसपा सबसे ज्यादा उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। आरएलपी, एनसीपी, सीपीआइ और सीपीआई (एम) भी अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में प्रत्याशी उतारने की रणनीति बना रहे हैं। इससे कई वार्डों में भाजपा-कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर के बजाय त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबला बन सकता है।
भाजपा और कांग्रेस कुछ वार्डों में स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए अधिकृत प्रत्याशी नहीं उतारकर निर्दलीय उम्मीदवारों को समर्थन दे सकती हैं। इस पर मंथन चल रहा है। दोनों दलों ने पिछले चुनावों में भी ऐसी रणनीति अपनाई थी। इस बार टिकट की संख्या से अधिक दावेदार होने के कारण यह विकल्प कई वार्डों में राजनीतिक समीकरण साधने का जरिया बन सकता है।
| श्रेणी | संख्या |
|---|---|
| कुल वार्ड | 7,500 |
| सामान्य | 4,507 |
| ओबीसी | 1,513 |
| एससी | 1,249 |
| एसटी | 239 |
| दल | पुरुष | महिला |
|---|---|---|
| भाजपा | 4,026 | 2,441 |
| कांग्रेस | 4,017 | 2,560 |
| बसपा | 186 | 85 |
| एनसीपी | 99 | 70 |
| आरएलपी | 87 | 59 |
| सीपीआइ | 08 | 12 |
| सीपीआई (एम) | 56 | 31 |
| निर्दलीय | 8,910 | 4,586 |
पिछला निकाय चुनाव 2019 से 2021 के बीच पांच चरणों में 196 निकायों में हुआ था। तब 7,500 वार्डों में 27,462 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे। इस बार 309 निकायों में एक साथ चुनाव हो रहा है और वार्डों की संख्या 10,245 हो गई है। टिकट के लिए राजनीतिक दलों के कार्यालयों में उमड़ रही भीड़ और निर्दलीय दावेदारों की संख्या को देखते हुए कुल उम्मीदवार 40 हजार पार कर सकते हैं।
Updated on:
28 Aug 2026 08:27 am
Published on:
28 Aug 2026 08:20 am
