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Rajasthan Politics : राजस्थान में 25 से बढ़कर 38 हो सकतीं हैं लोकसभा सीटें! जानें क्यों सुर्खियों में है ये सवाल

Rajasthan Politics : राजस्थान में अब 25 नहीं 38 लोकसभा सीटें हो सकती हैं। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि वर्ष 2029 से पहले केंद्र सरकार महिला आरक्षण कानून अधिनियम लागू कर सकती है। उसके बाद राजस्थान की लोकसभा सीटों में करीब 50 फीसद सीटों की बढ़ोत्तरी हो जाएगी।

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Rajasthan Politics Lok Sabha seats in Rajasthan may increase from 25 to 38 Know why this question is in headlines

फोटो पत्रिका

Rajasthan Politics : राजस्थान में जल्द 25 नहीं 38 लोकसभा सीटें हो जाएंगी हैं। इस चर्चा के बाद अचानक राजस्थान की राजनीति में गरमाहट आ गई है। इसके पीछे बड़ी वजह है कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण कानून यानी नारी वंदन अधिनियम को वर्ष 2029 से पहले लागू करने की योजना बना रही है। अगर ऐसा होता है तो देश की लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इसके लिए नए सिरे से परिसीमन तय होगा। इसका असर राजस्थान में भी पड़ेगा।

राजस्थान में इस वजह से लोकसभा की सीटें बढ़ सकती हैं। अभी राजस्थान में 25 लोकसभा सीटें हैं। अगर परिसीमन होता है तो 13 सीटें और बढ़ सकती हैं। यानी कुल 38 सीटें हो सकती हैं।

1951 में कैसी स्थिति थी?

देश में पहला आम चुनाव 1951 में हुआ था। उस समय राजस्थान में सिर्फ 18 लोकसभा सीटें थीं। इनमें 16 सीटों पर 1-1 सांसद चुने जाते थे, जबकि 2 सीटों पर 2-2 सांसद चुने जाते थे। उस

समय की मुख्य सीटें ये थीं: जयपुर–सवाई माधोपुर, भरतपुर–सवाई माधोपुर, अलवर, गंगानगर–झुंझुनू, बीकानेर–चूरू, जोधपुर, बाड़मेर–जालोर, सिरोही–पाली, नागौर–पाली, सीकर, जयपुर, टोंक, भीलवाड़ा, उदयपुर, बांसवाड़ा–डूंगरपुर (एसटी), चित्तौड़गढ़, कोटा–बूंदी और कोटा–झालावाड़।

वर्ष 1973 के परिसीमन में क्या बदलाव हुआ?

वर्ष 1973 में बने परिसीमन आयोग की सिफारिशों के बाद राजस्थान में लोकसभा सीटों की संख्या 18 से बढ़कर 25 हो गई। यानि करीब 7 लोकसभा सीटों का इजाफा हुआ। इनमें गंगानगर, बीकानेर, चूरू, झुंझुनू, सीकर, जयपुर, दौसा, अलवर, भरतपुर, बयाना, सवाई माधोपुर, अजमेर, टोंक, कोटा, झालावाड़, बांसवाड़ा, सलुंबर, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, पाली, जालौर, बाड़मेर, जोधपुर और नागौर शामिल थीं।

लोकसभा चुनाव 2024 में राजस्थान की 25 सीटें

गंगानगर (एससी), बीकानेर (एससी), चूरू, झुंझुनू, सीकर, जयपुर ग्रामीण, जयपुर, अलवर, भरतपुर (एससी), करौली-धोलपुर (एससी), दौसा (एसटी), टोंक-सवाई माधोपुर, अजमेर, नागौर, पाली, जोधपुर, बाड़मेर, जालौर, उदयपुर (एसटी), बांसवाड़ा (एसटी), चित्तौड़गढ़, राजसमंद, भीलवाड़ा, कोटा और झालावाड़-बारन। राजस्थान की इन लोकसभा सीटों में 4 सीटें एससी और 3 सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं।

वर्ष 2002-2008 में क्या हुआ?

वर्ष 2002 में परिसीमन आयोग ने काम शुरू किया। वर्ष 2008 में नई सीमाएं लागू हुईं। लेकिन उस समय सीटों की कुल संख्या नहीं बढ़ाई गई। आरक्षित सीटें कितनी हो सकती हैं? अगर सीटें बढ़कर 38 हो जाती हैं तो आरक्षित सीटों की संख्या भी बढ़ेगी।

अनुमान है कि एससी के लिए करीब 6 सीटें, एसटी के लिए 4 से 5 सीटें हो सकती हैं। बाकी 27-28 सीटें सामान्य रहेंगी। कुल आरक्षित सीटें 10-11 तक पहुंच सकती हैं। यह बदलाव जनसंख्या के आधार पर होगा और इससे राजस्थान की राजनीति पर भी गहरा असर पड़ेगा।