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Rajasthan: यूपी में सड़क पर मिले नवजात को उठा लाई महिला; अस्पताल में इलाज के दौरान सच उगलते ही मच गया हड़कंप

जयपुर के जेके लोन अस्पताल में उस समय हड़कंप मच गया जब नवजात का इलाज के लिए आई एक महिला ने डॉक्टरों को बताया कि उसके पास मौजूद सात दिन का नवजात वास्तव में उसका बच्चा नहीं है। उसने खुलासा किया कि, वह नवजात उसे उत्तर प्रदेश की सड़क पर लावारिस हालत में मिला था और वह उसे लेकर जयपुर पहुंची है।

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चाइल्ड हेल्पलाइन टीम की सदस्य के साथ नवजात, पत्रिका फोटो

जयपुर। जेके लोन अस्पताल में उस समय हड़कंप मच गया जब नवजात का इलाज कराने के लिए आई एक महिला ने डॉक्टरों को बताया कि उसके पास मौजूद 7 दिन का नवजात वास्तव में उसका बच्चा नहीं है। उसने खुलासा किया कि, वह नवजात उसे उत्तर प्रदेश में सड़क पर लावारिस हालत में मिला था और वह उसे लेकर जयपुर पहुंची है। अस्पताल प्रशासन ने संदेह होने पर तुरंत मामले की सूचना बाल कल्याण समिति और चाइल्ड हेल्पलाइन को दी।

यूपी पुलिस को दी थी सूचना, कार्रवाई नहीं हुई

महिला ने जेके लोन अस्पताल प्रशासन को बताया कि सड़क पर नवजात ​मिलने की सूचना यूपी पुलिस को दी थी लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर वह उसे लेकर जयपुर स्थित जेके लोन अस्पताल आ गई। अस्पताल में डॉक्टरों को भी महिला ने नवजात सड़क के किनारे मिलने की बात कही। ​एसएमएस थाना पुलिस ने महिला से मिली जानकारी के आधार पर घटना की तस्दीक करने के साथ ही नवजात के परिजनों की तलाश शुरू कर दी है।

नवजात को शिशु गृह की कस्टडी में भेजा

समिति के निर्देश पर नवजात को गांधी नगर स्थित शिशु गृह की कस्टडी में भेज दिया गया। चाइल्ड हेल्पलाइन कोऑर्डिनेटर दिनेश शर्मा के अनुसार, महिला ने बताया कि बच्चे के मिलने की सूचना उसने यूपी पुलिस को भी दी थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए वह इलाज के लिए बच्चे को साथ लेकर जयपुर आ गई। बाल कल्याण समिति ने कानूनी प्रक्रिया समझाते हुए बच्चे को शिशु गृह भेजने का निर्णय किया। इस बीच, नवजात को वापस लेने के प्रयास में महिला एक अन्य युवती के साथ गांधी नगर स्थित समिति कार्यालय तक पहुंच गई, लेकिन सदस्यों ने स्पष्ट कर दिया कि लावारिस शिशु को कोई भी मनमर्जी से अपने पास नहीं रख सकता। एसएमएस थाना पुलिस को भी अवगत करा दिया गया है।

नवजात मिलने के बढ़ रहे मामले

प्रदेश में नवजात मिलने के मामलों में बीते कुछ समय से बढ़ोतरी हुई है। पुलिस नवजात को शिशु गृह की कस्टडी या अस्पताल में भर्ती कराती है, लेकिन अधिकांश मामलों में नवजात के परिजनों को तलाशने की कार्रवाई ठंडे बस्ते में बंद हो जाती है। राजकीय पालना गृहों में छोड़े गए नवजात के परिजनों का भी अधिकांश मामलों में खुलासा नहीं हो पाता है।

लावारिस नवजात की सूचना देना अनिवार्य

कोई भी व्यक्ति लावारिस नवजात को अपने पास नहीं रख सकता। इसकी सूचना पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन या बाल कल्याण समिति को देना अनिवार्य है। वहीं बच्चा गोद लेने की पूरी प्रक्रिया सेंट्रल एडॉप्शन अथॉरिटी के माध्यम से तय होती है। इस मामले में जांच जारी है।-शीला सैनी, अध्यक्ष,बाल कल्याण समिति