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Jaipur: ऑक्सीजन देना भूल गए अफसर; सांस लेने के लिए भी स्कूल तरसे, केंद्र का 100 करोड़ देने से इनकार

Rajasthan's Education Budget: जयपुर। शिक्षा विभाग में अफसरशाही की लापरवाही ने राजस्थान के सरकारी स्कूलों की बुनियाद हिला दी है। केन्द्र सरकार की ओर से दी जा जाने वाली कम्पोजिट स्कूल ग्रांट इस सत्र 2025-26 में स्कूलों को नहीं मिली है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो मेटा एआइ

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो मेटा एआइ

Rajasthan's Education Budget: जयपुर। शिक्षा विभाग में अफसरशाही की लापरवाही ने राजस्थान के सरकारी स्कूलों की बुनियाद हिला दी है। केन्द्र सरकार की ओर से दी जा जाने वाली कम्पोजिट स्कूल ग्रांट इस सत्र 2025-26 में स्कूलों को नहीं मिली है। कारण है कि राजस्थान स्कूल परिषद के अफसर इस सत्र के लिए कम्पोजिट ग्रांट लेना ही भूल गए।

दरअसल, हर साल राज्य सरकार के प्रस्ताव पर केन्द्र की ओर से शिक्षा बजट जारी किया है। इस बजट में स्कूलों के दैनिक खर्च और अन्य विकास कार्यों के लिए 100 करोड़ के अधिक राशि की कम्पोजिट ग्रांट दी जाती है।

अफसरों ने शामिल ही नहीं की कम्पोजिट ग्रांट

हैरान करने वाली बात है कि केन्द्र को भेजे शिक्षा बजट के प्रस्ताव में अफसरों ने कम्पोजिट ग्रांट को शामिल ही नहीं किया। केन्द्र ने संकट को देखते हुए प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों की ग्रांट तो दे दी, लेकिन उच्च माध्यमिक स्कूलों की ग्रांट नहीं दी। इसका असर अब प्रदेश के करीब 20 हजार से अधिक उच्च माध्यमिक स्कूलों पर पड़ रहा है। ये स्कूल 100 से 120 करोड़ रुपए के संकट में फंस गए हैं। यह वही ग्रांट है जिसे स्कूलों के लिए ‘ऑक्सीजन’ माना जाता है, लेकिन सिस्टम की लापरवाही ने अब स्कूलों को सांस लेने के लिए भी तरसा दिया है।

सवाल: अब सरकार कैसे करेगी भरपाई

राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा ने कम्पोजिट स्कूल ग्रांण्ट संबंध में प्रारंभिक शिक्षा के कक्षा आठ तक के विद्यालयों के लिए जून 2025 में दिशा निर्देश जारी किए थे। उसी समय ही कक्षा 9 से 12 के समस्त स्कूलों को यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इस सत्र के लिए उन्हें ग्रांट नहीं मिलेगी। जबकि इसी ग्रांट का हवाला देकर स्कूलों में साफ सफाई अभियान, रैलियां प्रदर्शनियां , सामान्य मरम्मत , दीपावली पर भवन के रंग रोगन आदि कई काम करवाए गए और अभी तक विद्यालयों को कम्पोजिट स्कूल ग्रांट नहीं दी जा रही है। अफसरों की गलती की खमियाजा स्कूलों को उठना पड़ रहा है। सवाल है कि राज्य सरकार 100 करोड़ कैसे देगी।

बच्चों पर क्या असर

समग्र शिक्षा अभियान के तहत प्रदान की जाने वाली कम्पोजिट स्कूल ग्रांट, शिक्षा के क्षेत्र में आवश्यक बुनियादी संसाधनों की पूर्ति के लिए जरूरी है। यह योजना सभी के लिए समावेशी, गुणवत्तापूर्ण व संसाधनयुक्त शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से लागू की गई थी। कम्पोजिट स्कूल ग्रांट की अनुपलब्धता से स्कूलों में प्रशासनिक व्यवस्थाओं में भी कमी आ सकती है, जिससे छात्रों के नामांकन में गिरावट और अभिभावकों का विश्वास घट सकता है। कक्षाओं में पढ़ाई के माहौल में भी गिरावट आ सकती है।

स्कूलों को इस तरह से दी जाती है ग्रांट

  • 40 प्रतिशत उपयोग विद्यालय को सितम्बर से पहले

संबंधित खबरें

  • 30 प्रतिशत उपयोग दिसम्बर से पहले
  • समस्त उपयोग फरवरी से पूर्व करना जरुरी है।

नामांकन के आधार पर मिलती राशि

1-30 नामांकन पर 10 हजार रुपए

31-100 नामांकन पर 25 हजार रुपए

101-250 नामांकन पर 50 हजार रुपए

251-1000 नामांकन पर 75 हजार रुपए

1000 से अधिक नामांकन पर एक लाख रुपए

दस प्रतिशत राशि केवल स्वच्छता कार्य पर व्यय करनी अनिवार्य

पिछले सालों में इस तरह मिला अनुदान

वर्षकेंद्र से मांगा गया अनुदानकेंद्र से प्राप्त अनुदान
2021-229,799.109,799.10
2022-2310,154.6510,154.65
2023-2410,578.3510,578.35
2024-2511,331.7511,331.75
2025-26अनुदान मांगा ही नहीं गयाशून्य (0)

स्रोत: भारत सरकार, समग्र शिक्षा पीएबी (PAB) मीनिट्स

मौका मिला तो देखा फायदा

विभाग को सत्र के दौरान नवंबर में पूरक अनुदान लेने का मौका भी मिला तब भी भारत सरकार से स्कूलों के लिए कम्पोजिट स्कूल ग्रांण्ट नहीं मांगी गई। इस दौरान चहेती फर्मों को भुगतान करने के लिए लाईब्रेरी और स्पोर्टस सामग्री के लिए अनुदान के रुप में राशि ले ली गई।

ये अफसर जिम्मेदार:-

  • शासन सचिव स्कूल शिक्षा
  • ⁠परियोजना निदेशक एसएमएसए
  • ⁠अतिरिक्त परियोजना निदेशक-उपायुक्त योजना व गुणवत्ता
  • ⁠उपनिदेशक योजना व गुणवत्ता