
सतीश पूनिया (पत्रिका फोटो)
Rajya Sabha Elections: राजस्थान की तीन राज्यसभा सीटों के लिए बीजेपी और कांग्रेस ने गुरुवार को अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। बीजेपी ने पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया और राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर को मैदान में उतारकर जाट, गुर्जर और ओबीसी समीकरण साधने की रणनीति अपनाई। वहीं, कांग्रेस ने मौजूदा सांसद नीरज डांगी को दोबारा मौका देकर दलित प्रतिनिधित्व और संसदीय अनुभव पर भरोसा जताया है।
बता दें कि राजस्थान विधानसभा में संख्या बल को देखते हुए बीजेपी की दो और कांग्रेस की एक सीट पर जीत तय मानी जा रही है। बीजेपी ने राजस्थान से राज्यसभा सदस्य एवं केंद्रीय रेल राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू तथा मध्यप्रदेश से सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री जॉर्ज कुरियन को दोबारा मौका नहीं दिया।
बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव में दो ऐसे नेताओं को मौका दिया है, जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय हैं। सतीश पूनिया जहां जाट समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं, अलका गुर्जर प्रभावशाली गुर्जर समाज से आती हैं। दोनों ओबीसी वर्ग से हैं। बीजेपी ने पूर्वी राजस्थान में गुर्जर और पूरे प्रदेश में जाट समाज को संदेश देने के साथ महिला नेतृत्व को भी प्रमुखता देने का प्रयास किया है।
सतीश पूनिया वर्तमान में हरियाणा बीजेपी के प्रभारी हैं और प्रदेशाध्यक्ष रहते संगठन को मजबूत करने में भूमिका रही है। विधानसभा में हार के बावजूद केंद्रीय नेतृत्व ने भरोसा बनाए रखा। वहीं, अलका गुर्जर राष्ट्रीय सचिव व दिल्ली भाजपा की सह-प्रभारी हैं। वे विधायक मंत्री भी रह चुकी हैं। उनके पति नाथू सिंह भी सांसद, विधायक और मंत्री रह चुके हैं।
कांग्रेस ने मेघवाल (अनुसूचित जाति) समाज से आने वाले नीरज डांगी को फिर मौका देकर दलित प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता दी है। माना जा रहा है कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के भरोसे ने भी उनकी दावेदारी को मजबूती दी।
पाली जिले से जुड़े 56 वर्षीय डांगी लंबे समय तक कांग्रेस संगठन में सक्रिय रहे हैं। वे साल 2004 से 2009 तक युवा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष रहे। वे 3 बार विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। साल 2020 में राज्यसभा पहुंचे। कांग्रेस उम्मीदवार नीरज डांगी शुक्रवार को विधानसभा में नामांकन दाखिल करेंगे।
भरोसेमंद चेहरों पर बीजेपी का दांव, अनुभव और संगठन का संतुलन
Updated on:
05 Jun 2026 12:39 pm
Published on:
05 Jun 2026 12:39 pm
