
हर्षित जैन
Rakshabandhan Shubh Muhurt: भाई-बहन के अटूट स्नेह का पर्व रक्षाबंधन चर्तुदशी युक्त पूर्णिमा में गुरूवार 11 अगस्त को प्रदोष काल युक्त श्रवणनक्षत्र, आयुष्मान, सौभाग्य योग में मनाया जाएगा। परकोटे समेत अन्य बाजारों में पर्व की रंगत देखते ही बन रही है। जगह-जगह राखियों के बाजार सज चुके हैं। ज्योतिषाचार्य पं.दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि गुरूवार को पूर्णिमा सुबह 10.49 बजे से शुरू होकर अगले दिन शुक्रवार को सुबह 7.06 बजे तक रहेगी। शुक्रवार को पूर्णिमा त्रिमुहूर्त होने से कम होने से 11 अगस्त को ही रक्षाबंधन का पर्व प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा में मनेगा। पर्व पर रात 8.52 बजे तक भद्रा रहेगी। शास्त्रों में भद्रा काल में राखी बांधना निषेध है। राखी बांधने का श्रेष्ठ समय रात 8.52 बजे से 9.15 बजे तक रहेगा। चर के चौघड़िए में भ्रदा के बाद 9.48 तक भी राखी बांधी जा सकती है। जल्दी होने पर भद्रापुच्छ काल में शाम 5.07 से 6.19 बजे तक राखी बांध सकते हैं।
ज्योतिषाचार्य पं.घनश्याम शर्मा ने बताया कि ग्रंथ वृहद ज्योतिषसार के मुताबिक भद्रा का निवास मकर राशि के चंद्र में पाताल लोक में होता है। उतरार्द्ध में भद्रा अंगार, व्यातिपात, वैधृति आदि कुयोग निष्प्रभावी होते हैं। ऐसी परिस्थिति में गुरूवार को मध्यान्ह के बाद पर्व मनाना शास्त्रसंवत है। कई साल बाद इस बार भ्रदा पर्व पर लंबे समय दस घंटे तक रहेगी। उक्त योग पर्व की महत्ता को खास बनाएंगे।
सात समंदर पार बजेगा राजधानी का डंका:
इधर गौसंरक्षण को बढ़ावा देने के साथ ही इस बार रक्षाबंधन पर हरियाली को भी बढ़ावा मिलेगा। सात समंदर पार गाय का गोबर निर्यात करने के बाद भारतीय जैविक किसान उत्पादक संघ के बैनर तले राखियां निर्यात की जाएगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अतुल गुप्ता ने बताया कि महिला ईकाई अब प्रवासी भारतीयों के लिए हर्बल गाय के गोबर से निर्मित औषधीय तुलसी, अश्वगंधा के साथ ही फलदार, छायादार पौधों के लिए बीज वाली हर्बल राखियां निर्यात होगी। अमेरिका व मॉरिशस से करीब 60 हजार गोबर से निर्मित राखियों के ऑर्डर मिला है। जयपुर में करीब 250 स्थानों पर यह राखियां बेची जाएंगी।
महिलाओं को मिला रोजगार:
राष्ट्रीय अध्यक्ष संगीता गौड़ ने बताया कि पिंजरापोल गोशाला परिसर के सनराइज ऑर्गेनिक पार्क में हैनिमैन चैरिटेबल मिशन सोसाइटी की महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को भी रोजगार मिला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जयपुर और देश की साख बढे़गी। राखी को फेंकने की बजाय गमले में या घर की बाड़ी में डाल सकतें है। सूखी गोबर के बारीक चूर्ण में हल्दी, चंदन, ग्वारफली का चूर्ण की से राखी तैयार हुई है। पौधे तैयार होने से जैविक कृषि को भी बढ़ावा मिलेगा। सोसाइटी की सचिव मोनिका गुप्ता ने बताया कि गोशाला के सनराइज ऑर्गेनिक पार्क से अमेरिका से 40 हजार, मॉरिशस से 20 हजार सहित अन्य देशों के आर्डर मिले हैं।
खास-खास
-50 अधिक महिलाओं को मिला रोजगार
-एक दिन में तैयार की जा रही प्रति महिला 100 राखियां
-40 टन गोबर लिया ज रहा काम में
-एक राखी की कीमत 25 से 35 रुपए
Published on:
06 Aug 2022 11:33 am
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