
Electricity consumers: चेक किया जाएगा बिजली लोड (Photo Source - Patrika)
जयपुर। राजस्थान में बिजली सरप्लस होने के सरकारी दावों के बीच बिजली व्यवस्था की हकीकत सामने आई है। पीक आवर्स में बढ़ी मांग के दौरान राजस्थान को बिजली एक्सचेंज से पर्याप्त बिजली नहीं मिल सकी। हालात ऐसे बने कि राज्य को धौलपुर के गैस आधारित बिजलीघर से महंगा उत्पादन कराना पड़ा। एक्सचेंज में 10 रुपए प्रति यूनिट तक की दर पर भी बिजली नहीं मिली, जबकि धौलपुर प्लांट से उत्पादन लागत करीब 28 रुपए प्रति यूनिट तक पहुंच गई। इस दौरान करीब 21 लाख यूनिट महंगी बिजली उपभोक्ताओं को सप्लाई की गई।
गैस आधारित पावर प्लांट सामान्यतः आपात स्थिति में ही संचालित किए जाते है, क्योंकि उत्पादन लागत काफी अधिक है। इसके बावजूद 25 से 27 मई तक लगातार तीन दिन धौलपुर प्लांट चलाना पड़ा। इस घटनाक्रम ने ऊर्जा विकास निगम की मांग आकलन, अग्रिम बिजली खरीद और समग्र बिजली प्रबंधन रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए है। हालाकि, अधिकारी सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं। उनका कहना है कि कई ग्रिड स्टेबिलिटी के लिए भी जरूरत होती है।
पीक डिमांड के दौरान बिजली एक्सचेंज में दरें अधिकतम 10 रुपए प्रति यूनिट तक पहुंचती हैं। कैपिंग के कारण सामान्य परिस्थितियों में इससे अधिक दर पर बिजली की खरीद-बिक्री नहीं होती। राजस्थान ऊर्जा विकास निगम और डिस्कॉम्स की औसत बिजली खरीद लागत 5.80 से 6.30 रुपए प्रति यूनिट के बीच है। पीएम-कुसुम और स्थानीय स्तर पर स्थापित सौर प्रोजेक्ट से बिजली करीब 3.20 रुपए प्रति यूनिट में खरीदी गई, जबकि नई सौर परियोजनाओं के टैरिफ 2.50 से 3.50 रुपए प्रति यूनिट तक रहे हैं। ऐसे में ऊर्जा विकास निगम की औसत बिजली खरीद लागत करीब 6 रुपए प्रति यूनिट है, वहीं धौलपुर प्लांट से 28 रुपए प्रति यूनिट तक की बिजली खरीदनी पड़ी यानी सामान्य लागत से लगभग पांच गुना महंगी।
जीटी-1 10.70 लाख यूनिट
जीटी-2 10.50 लाख यूनिट
धौलपुर कंबाइंड साइकिल पावर प्लांट वर्षों से महंगा सौदा बना हुआ है। राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम इसके लिए गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) से ईंधन लेता रहा है। अभी अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमत बहुत ज्यादा है, इस कारण बिजली उत्पादन लागत भी बढ़ गई। करीब 10 साल में प्लांट का संचालन 5-6 बार कुछ दिनों के लिए ही हुआ।
धौलपुर गैस प्लांट पहले 9 जनवरी, 2026 को संचालित हुआ था। इसके बाद करीब चार माह तक प्लांट बंद रहा। 25 मई को अचानक बढ़ी मांग के कारण इसे दोबारा शुरू किया गया। गैस आधारित प्लांट आमतौर पर तभी चलाए जाते हैं जब अन्य स्रोतों से बिजली उपलब्ध नहीं हो।
समय रहते बिजली खरीदने की व्यवस्था क्यों नहीं हो सकी?
महंगे गैस आधारित उत्पादन की नौबत क्यों आई?
क्या मांग का आकलन, खरीद योजना जरूरत के अनुरूप नहीं थी?
महंगी बिजली का उत्पादन क्यों किया गया, क्या कारण रहे। उस समय सामान्य दर पर कितनी बिजली उपलब्ध रही। इससे जुड़े सभी पहलुओं का पता किया जाएगा।
-हीरालाल नागर, ऊर्जा मंत्री
Updated on:
18 Jun 2026 09:06 am
Published on:
18 Jun 2026 09:06 am
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