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राजस्थान में बिजली उपभोक्ताओं को मिलेगा GST कटौती का फायदा, सौर-पवन ऊर्जा हो सकती है सस्ती, RERC के निर्देश जारी

RERC ने नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन, बायोगैस सहित अन्य) उपकरणों पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किए जाने को 'चेंज इन लॉ' (कानूनी बदलाव) मानते हुए इसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

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फोटो: AI

Rajasthan Electricity Consumers: राजस्थान विद्युत नियामक आयोग (RERC) ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े उपभोक्ताओं को राहत देने वाला महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। आयोग ने सौर, पवन, बायोगैस सहित अन्य अक्षय ऊर्जा उपकरणों पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किए जाने को 'चेंज इन लॉ' (कानूनी बदलाव) माना है। इसके साथ ही आयोग ने निर्देश दिए हैं कि इस कर कटौती से प्रोजेक्ट लागत में हुई बचत का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए।

आयोग के अनुसार, 22 सितंबर 2025 से लागू जीएसटी कटौती के कारण अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं की कुल लागत में कमी आई है। ऐसे में इस बचत का लाभ डिस्कॉम के माध्यम से बिजली उपभोक्ताओं को मिलना चाहिए। माना जा रहा है कि इस फैसले के बाद सौर और पवन ऊर्जा स्रोतों से खरीदी जाने वाली बिजली 10 से 15 पैसे प्रति यूनिट तक सस्ती हो सकती है।

आरईआरसी ने अपने आदेश में कहा है कि अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं की लागत कम होने से डिस्कॉम पर बिजली खरीद का वित्तीय बोझ भी घटेगा। इससे बिजली खरीद व्यवस्था अधिक किफायती होगी और उपभोक्ताओं को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। आयोग ने सभी संबंधित बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) और परियोजना डेवलपर्स को निर्देश दिए हैं कि वे 90 दिनों के भीतर जीएसटी कटौती से हुई वास्तविक बचत का आकलन करें और उसे टैरिफ निर्धारण प्रक्रिया में शामिल करें।

इन प्रोजेक्ट्स पर लागू होगा आदेश

आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश उन परियोजनाओं पर लागू होगा जिनकी बिड 22 सितंबर 2025 से पहले लगी थी, लेकिन जिनमें उपकरणों या सेवाओं का बिल अथवा भुगतान 22 सितंबर 2025 के बाद किया गया है। इसके अलावा निर्माणाधीन और पहले से संचालित दोनों प्रकार की परियोजनाएं इस आदेश के दायरे में आएंगी, बशर्ते संबंधित खरीद या भुगतान जीएसटी दरों में कटौती लागू होने के बाद हुआ हो।

ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग के इस फैसले से बिजली क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं की वास्तविक लागत के अनुरूप टैरिफ तय हो सकेंगे। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलने के साथ-साथ स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा को भी बढ़ावा मिलेगा।

आयोग के आदेश से बिजली क्षेत्र में पारदर्शिता आएगी। साथ ही अक्षय ऊर्जा प्रोजेक्ट्स की वास्तविक लागत कम होने से उपभोक्ता को राहत मिलेगी।
डी.डी. अग्रवाल, ऊर्जा विशेषज्ञ