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जयपुर। राजस्थान में आरजीएचएस से जुड़े दवा विक्रेताओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दवा विक्रेताओं का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द ही बकाया भुगतान जारी नहीं किया तो वे आरजीएचएस के तहत दवाएं देना पूरी तरह बंद कर देंगे। इस निर्णय से प्रदेश के लाखों कार्मिक और उनके आश्रित प्रभावित हो सकते हैं।
सोमवार को प्रादेशिक दवा विक्रेता समिति की प्रदेश स्तरीय बैठक जयपुर के मानसरोवर स्थित होटल में हुई। इसमें प्रदेशभर से दवा विक्रेता शामिल हुए और सरकार तक अपनी प्रमुख मांगें पहुंचाने का निर्णय लिया। समिति के अध्यक्ष विवेक विजयवर्गीय ने बताया कि सरकार ने दवा विक्रेताओं को 21 दिन में भुगतान करने का वादा किया था, लेकिन पिछले 180 दिन से भुगतान अटका हुआ है।
फिलहाल राजस्थान के करीब 5 हजार दवा विक्रेता आरजीएचएस से जुड़े हैं। इनका करीब 880 करोड़ रुपए का भुगतान अटका हुआ है। पिछले चार साल से ये दवा विक्रेता राज्य के लगभग 13 लाख सरकारी कार्मिकों और उनके 38 लाख परिजनों को कैशलेस दवाएं उपलब्ध करवा रहे हैं। लेकिन बकाया भुगतान न होने से उनकी आर्थिक स्थिति डगमगा गई है। कई दवा विक्रेताओं को कर्ज पर दुकान चलानी पड़ रही है, तो कुछ ने घर के गहने तक गिरवी रख दिए हैं।
विजयवर्गीय ने कहा कि सरकार और अधिकारियों तक कई बार गुहार लगाने के बावजूद सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में अब सभी दवा विक्रेता 15 से 17 सितंबर तक काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध करेंगे। इसके बाद भी अगर भुगतान नहीं हुआ तो सभी विक्रेता जयपुर में एकत्र होकर महासभा करेंगे और दवा आपूर्ति बंद करने की अंतिम रणनीति तय करेंगे।
दवा विक्रेताओं ने आरोप लगाया कि आरजीएचएस पोर्टल से 4 लाख से ज्यादा बिल गायब कर दिए गए हैं। साथ ही टीपीए द्वारा फर्जी कारणों से बिल रिजेक्ट किए जा रहे हैं। कई बार किसी मरीज के नाम में ‘मिस्टर’ या ‘मिसेज’ लिखे होने पर भी इसे नाम मिसमैच बताकर पूरा बिल रिजेक्ट कर दिया जाता है।
Published on:
15 Sept 2025 09:09 pm
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