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Rajasthan : रींगस-खाटूश्यामजी रेल लाइन परियोजना में आई तेजी, सिर्फ 15 मिनट में तय होगा सफर, जानें क्या होंगे और फायदे

Rajasthan : खाटूश्यामजी धाम से जुड़ी बहुप्रतीक्षित रींगस-खाटूश्यामजी नई रेल लाइन परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। प्रोजेक्ट पूरा होने पर यह सफर सिर्फ 15 मिनट में तय होगा। जानिए इस परियोजना से और क्या फायदे होंगे?

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Ringas Khatushyamji rail line project gains momentum journey will take only 15 minutes know what benefits

पत्रिका फाइल फोटो और AI

Rajasthan : खाटूश्यामजी धाम से जुड़ी बहुप्रतीक्षित रींगस–खाटूश्यामजी नई रेल लाइन परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। राजस्थान में रींगस से खाटूश्यामजी तक 17.49 किमी लंबी नई रेल लाइन की तैयारियां जोर-शोर से चल रही है। जिस पर 254.06 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इस रेल लाइन के बन जाने पर खाटूश्यामजी के दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सीधा रेल संपर्क मिलेगा। वर्तमान में रींगस से खाटूश्यामजी के बीच कोई रेलवे स्टेशन नहीं है। नई रेल लाइन के निर्माण से यह दूरी ट्रेन से करीब 15 मिनट में तय की जा सकेगी। अभी यात्रियों को रींगस से निजी वाहनों या पैदल यात्रा करनी पड़ती है।

रेल मार्ग पर बनाई जाएंगी तीन लूप लाइनें

रेलवे के अनुसार, रेल मार्ग पर तीन लूप लाइनें बनाई जाएंगी। यह मुख्य लाइन के समानांतर चलकर फिर उसमें मिल जाएंगी। इससे ट्रेनों को पार्किंग और पारगमन में सहूलियत मिलेगी। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए परियोजना में कहीं भी लेवल क्रॉसिंग नहीं बनाई जाएगी। मार्ग में कुल 8 छोटे पुल और 21 अंडरब्रिज प्रस्तावित हैं।

खाटूश्यामजी मंदिर की थीम पर होगा रेलवे स्टेशन

रेल लाइन के साथ ही खाटू श्यामजी रेलवे स्टेशन का निर्माण चारण मैदान से करीब 100 मीटर दूर केरपुरा-लामियां रोड के पास किया जाएगा। रेलवे स्टेशन मंदिर से केवल 1.5 किमी की दूरी पर होगा। इसका डिजाइन पूरी तरह से खाटूश्यामजी मंदिर की थीम पर आधारित होगा। स्टेशन का मुख्य द्वार मंदिर के गुंबद के आकार में बनाया जाएगा। साथ ही दोनों ओर पारंपरिक बरामदे होंगे। स्टेशन परिसर में शेखावाटी की कला को दर्शाती चित्रकारी भी लगाई जाएगी। स्टेशन के सामने एक बड़ा पार्क भी विकसित किया जाएगा।

विशेष अवसरों पर जयपुर-रींगस-खाटू मार्ग पर भारी जाम लगता है, जिससे यात्रियों को कई घंटे रुकना पड़ना पड़ जाता था। लेकिन नई रेल लाइन के तैयार होने के बाद सीधे ट्रेनें खाटूश्यामजी स्टेशन तक पहुंचेंगी, जिससे यात्रा समय लगभग आधा हो जाएगा। रेलवे का अनुमान है कि इस लाइन के शुरू होने पर सप्ताहांत, एकादशी और फाल्गुन मेले के दौरान श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी।

पर्यटकों की संख्या में 25 से 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्मीद

धार्मिक पर्यटन के लिहाज से यह परियोजना पूरे इलाके के विकास को नया आयाम देगी। अभी खाटू धाम हर साल लगभग 40 लाख श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहता है। नई रेल लाइन के बाद यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में 25 से 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इससे होटल व्यवसाय, भोजनालयों, स्थानीय दुकानों और टैक्सी सेवाओं को भी बड़ा फायदा मिलेगा। रेलवे स्टेशन के पास नए वाणिज्यिक क्षेत्र विकसित होंगे, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पूरा क्षेत्र आर्थिक रूप से मजबूत होगा।

अंतिम चरण में तकनीकी सर्वेक्षण और मिट्टी परीक्षण का काम

परियोजना की वर्तमान स्थिति की बात करें तो रेलवे ने रूट अलाइनमेंट को अंतिम रूप दे दिया है। भूमि अधिग्रहण के लिए 70 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है, जबकि बाकी जमीन के लिए बातचीत जारी है। तकनीकी सर्वेक्षण और मिट्टी परीक्षण का काम भी अंतिम चरण में है।

करीब 30 माह में रेल लाइन पूरा करने का लक्ष्य

रेलवे अधिकारियों के अनुसार निर्माण कार्य 2026 में शुरू कर दिया जाएगा। पूरी रेल लाइन को 24 से 30 महीनों में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। यदि कार्य तय समय से आगे बढ़ा तो 2028 तक पहली ट्रेन खाटूश्यामजी स्टेशन पर पहुंच सकती है।

मुख्य फायदे

सीधी कनेक्टिविटी: नई लाइन से ट्रेन से सीधा खाटू पहुंचेंगे।
यात्रियों का समय बचेगा: सिर्फ 15 मिनट में तय होगा सफर।
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा: धार्मिक पर्यटन बढ़ेगा, जिससे स्थानीय कारोबार-रोजगार मिलेगा।
आर्थिक विकास : स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
क्षेत्र का विकास : जीणमाता और सालासर जैसे अन्य धार्मिक स्थलों तक बेहतर कनेक्टिविटी होगी।

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