
परकोटा
गलियों में बन रहे बाजार...परकोटे से लोगों का पलायन, बाहर के इलाके हो रहे आबाद
-मुख्य बाजार तो पूरी तरह से हो रहे गए व्यावसायिक, गलियों में भी खड़े हो रहे कॉम्प्लेक्स
-बिन आबादी सूना जाएगा परकोटा पार्किंग की दिक्कत, रिश्तेदार कहते...हम नहीं आ रहे, गाड़ी कहां खड़ी करेंगे
जयपुर. शहर की पहचान परकोटा (Parkota Jaipur) से लोगों का तेजी से पलायन हो रहा है। कारण व्यावसायिक गतिविधियों के कारण यहां मुख्य बाजार ही नहीं गलियों तक से गुजरना मुश्किल हो गया है। दिनभर चिल-पौं, गहमा-गहमी। घरों के बाहर पार्किंग तक के लिए जगह नहीं। ऐसे में लोग सुकून की तलाश में वैशाली नगर, जगतपुरा, मालवीय नगर, मानसरोवर जैसे बाहरी इलाकों में अपने लिए नए घर तलाश रहे हैं।
दरअसल, परकोटे के मुख्य बाजारों में व्यवसाय के लिए जगह नहीं बची तो अब गलियों में बाजार बढऩा शुरू हो गए। उसका नुकसान यह हुआ कि आबादी परकोटे से बाहर जाने को मजबूर हो गई। पिछले 20 वर्ष में प्रमुख बाजारों से सटी गलियों में कॉम्प्लेक्स बने हैं। इसके बाद लोग परकोटा छोड़ बाहरी इलाकों में बसने को मजबूर हो गए।
इस कारण जा रहे लोग
- कॉम्प्लेक्स के कारण दिनभर भीड़-भाड़, गाडिय़ां।
-पार्किंग के लिए जगह नहीं है। गाड़ी घर तक आ नहीं सकती।
-गली में एम्बुलेंस तक नहीं आ पाती।
-बच्चों के खेलने के लिए जगह नहीं।
-गंदगी और कचरे के ढेर लगे रहते हैं।
-सीवर लाइन जर्जर है। आए दिन चोक हो जाती है।
फायदे ये बताए
- आपराधिक घटनाएं अपेक्षाकृत कम होती हैं।
-रहने के लिहाज से परकोटे ज्यादा मुफीद।
-जायके के शौकीनों के लिए गली-गली में चटखारा।
खास-खास
-600 से अधिक कॉम्प्लेक्स खड़े हो गए गलियों में।
-15 वर्ष में परकोटे से तेजी से हुआ पलायन।
यहां की मूल आबादी निकली
नाहरगढ़ रोड (Nahargarh Road), खजाने वालों का रास्ता (Khazane Waalo ka Rasta) , दीनानाथ जी की गली (Deenanath Ji ki Gali), गोपाल जी का रास्ता (Gopal Ji Ka Rasta), लाल जी सांड का रास्ता (Laal Ji Saand Ka Rasta), भडों का रास्ता (Bhindo K Rasta), घी वालों का रास्ता (Ghee Waalo Ka Rasta), हल्दियों का रास्ता (Haldiyon Ka rasta) और एमएसबी का रास्ता (MSB Ka Rasta) के मूल निवासी तेजी से पलायन कर रहे हैं।
वर्जन...
मेरे घर के बाहर कच्चा हुआ करता था। हम वहीं खेलकर बड़े हुए हैं। अब तो निकलने की जगह नहीं बची है। जगतपुरा में मकान लिया है। जल्द ही वहां शिफ्ट होंगे। अमित शर्मा, नाहरगढ़ रोड
पार्किंग की बड़ी दिक्कत है। रिश्तेदार भी आने से कतराते हैं। इस कारण अब परकोटे के बाहर घर खरीदा है। जाने का मन तो नहीं करता लेकिन अब यहां हालात रहने लायक नहीं। लक्ष्य पारीक, चौड़ा रास्ता
पलायन रोकना होगा
परकोटे में आबादी का रहना जरूरी है। यही जीवित शहर की पहचान भी है। गलियों में बाजार बनने से लोग बाहर जाने को मजबूर हुए। सरकार किसी की भी रही हो, लेकिन परकोटे पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। 50 से 60 फीसदी आबादी शहर के बाहरी कॉलोनियों में शिफ्ट हो चुकी है।-सियाचरण लश्करी, संस्थापक अध्यक्ष, जयपुर फाउंडेशन
दरअसल, परकोटे के मुख्य बाजारों में व्यवसाय के लिए जगह नहीं बची तो अब गलियों में बाजार बढऩा शुरू हो गए। उसका नुकसान यह हुआ कि आबादी परकोटे से बाहर जाने को मजबूर हो गई। पिछले 20 वर्ष में प्रमुख बाजारों से सटी गलियों में कॉम्प्लेक्स बने हैं। इसके बाद लोग परकोटा छोड़ बाहरी इलाकों में बसने को मजबूर हो गए।
इस कारण जा रहे लोग
- कॉम्प्लेक्स के कारण दिनभर भीड़-भाड़, गाडिय़ां।
-पार्किंग के लिए जगह नहीं है। गाड़ी घर तक आ नहीं सकती।
-गली में एम्बुलेंस तक नहीं आ पाती।
-बच्चों के खेलने के लिए जगह नहीं।
-गंदगी और कचरे के ढेर लगे रहते हैं।
-सीवर लाइन जर्जर है। आए दिन चोक हो जाती है।
फायदे ये बताए
- आपराधिक घटनाएं अपेक्षाकृत कम होती हैं।
-रहने के लिहाज से परकोटे ज्यादा मुफीद।
-जायके के शौकीनों के लिए गली-गली में चटखारा।
खास-खास
-600 से अधिक कॉम्प्लेक्स खड़े हो गए गलियों में।
-15 वर्ष में परकोटे से तेजी से हुआ पलायन।
यहां की मूल आबादी निकली
नाहरगढ़ रोड (Nahargarh Road), खजाने वालों का रास्ता (Khazane Waalo ka Rasta) , दीनानाथ जी की गली (Deenanath Ji ki Gali), गोपाल जी का रास्ता (Gopal Ji Ka Rasta), लाल जी सांड का रास्ता (Laal Ji Saand Ka Rasta), भडों का रास्ता (Bhindo K Rasta), घी वालों का रास्ता (Ghee Waalo Ka Rasta), हल्दियों का रास्ता (Haldiyon Ka rasta) और एमएसबी का रास्ता (MSB Ka Rasta) के मूल निवासी तेजी से पलायन कर रहे हैं।
यहां की मूल आबादी निकली
नाहरगढ़ रोड (Nahargarh Road), खजाने वालों का रास्ता (Khazane Waalo ka Rasta) , दीनानाथ जी की गली (Deenanath Ji ki Gali), गोपाल जी का रास्ता (Gopal Ji Ka Rasta), लाल जी सांड का रास्ता (Laal Ji Saand Ka Rasta), भडों का रास्ता (Bhindo K Rasta), घी वालों का रास्ता (Ghee Waalo Ka Rasta), हल्दियों का रास्ता (Haldiyon Ka rasta) और एमएसबी का रास्ता (MSB Ka Rasta) के मूल निवासी तेजी से पलायन कर रहे हैं।
Published on:
27 Mar 2023 12:24 am
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