
जयपुर । अखिलेश की माँ अब भी दरवाजे की ओर टकटकी लगाए इस उम्मीद के साथ देखती है कि उनका बेटा जरूर आएगा। लेकिन न अखिलेश आता है न उसकी कोई आवाज आती है वह सदमे हैं और नींद में भी उसकी नाम लेकर बड़बड़ाती रहती हैं। 18 लाख की बाइक की चोट से अपनी जान गवां बैठा अखिलेश चार भाई-बहनों में सबसे छोटा था। यही कारण था कि परिवार सभी लोग से लाड-प्यार किया करते थे और प्यार से उसे गोलू और गोल्या नाम से पुकारते थे। अखिलेश घटना वाले दिन शादी में खाना खाने की बात कहकर घर से गया था और जल्दी लौट कर आने के लिए कहा था, लेकिन क्या पता था, कि वह लौटकर फिर कभी नहीं आएगा।
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मैं टूटा तो परिवार टूट जाएगा
अखिलेश के पिता गणेश सारसर शासन सचिवालय में चतुर्थ श्रेणी में कर्मचारी हैं। आंखों में आए आंसू रोकने की भरसक कोशिश करते हुए कहते हैं कि मेरा छोटा बेटा अखिलेश सबकी आंख का तारा था, उससे मुझे बहुत उम्मीदें थीं। लेकिन उसकी मौत ने पूरे परिवार को तोडकऱ रख दिया है। आंसुओं को पोंछते हुए कहते हैं कि मेरी स्थिति का अंदाजा कोई नहीं लगा सकता है। छोटी सी नौकरी में बेटे रघुनंदन और बेटी लक्ष्मी की शादी की है। छोटा बेटा योगेश की पढ़ाई भी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वह भी कक्षा 12वीं तक ही पढ़ सका। अखिलेश परिवार ही नहीं बल्कि बल्कि पड़ोसियों के छोटे से छोटे काम को भी कभी मना नहीं करता था।
गौरतलब है कि जवाहर सर्किल थाना इलाके स्थित वल्र्ड ट्रेड पार्क के सामने गत 13 दिसम्बर की रात हुए सडक़ हादसे में घायल हुए नाहरगढ़ निवासी अखिलेश की सवाई मानसिंह अस्पताल में इलाज के दौरान शनिवार को मौत हो गई थी। जबकि लग्जरी बाइक चालक गोपालपुरा निवासी रोहित सिंह शेखावत ने भी दुर्घटना वाली रात ही जयपुरिया अस्पताल में दम तोड़ दिया था।
Published on:
17 Dec 2017 09:41 pm
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