
सरकार मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लेना चाहती… वहीं 15 जुलाई को हुए समझौते को भी लागू करने से सरकार बच रही है… इधर प्रदेश में जल्द ही चुनाव आचार सहिंता लागू होने वाली है…और सरकार ठोस निर्णय लेने की बजाय टालमटोल का रवैया अपना रही है।
बाइट- एमएल यादव, रोडवेज कर्मी नेता
हड़ताल के आज तीसरे दिन भी आमजन बे-बस रहा। हड़ताल के कारण बसों के शोर और यात्रियों की आवाजाही थम गई है। पूरे बस स्टैंड पर वीरानी छाई हुई है। यात्रियों को अपने गंतव्य तक जाने के लिए मजबूरन निजी बसों और ट्रेनों का रुख करना पड़ रहा है। निजी बस आॅपरेटर्स भी मौके का जमकर फायदा उठा रहे हैं और यात्रियों से लोक परिवहन सेवा बसों के साथ निजी बसों में मनमाना किराया वसूला जा रहा है।
देश में 54 सरकारी रोडवेज है. इनमे अधिकांश घाटे में है. दिल्ली की डीटीसी घाटे में सबसे ऊपर है. मगर कुछ रोडवेज मुनाफा भी कमा रही है। जैसे यूपी, कर्नाटक, उड़ीसा, हिमाचल और बेंगलुरु मेट्रो बस सेवा। क्या राजस्थान इन लाभ कमाने वाली सड़क परिवहन सेवाओं से कुछ नहीं सीख सकते? बिलकुल सीख सकता है, लेकिन मुश्किल यह है कि राज्य में ज्यादातर निजी बसें राजनेताओं और आला नौकरशाहों अपने रिश्तेदारों के नाम से चला रखी है और रोडवेज बंद रहने पर उनके वारे-न्यारे हो जाते हैं। वे तो चाहते हैं कि रोडवेज मध्य प्रदेश की तरह सदा के लिए बंद ही हो जाए…