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राजस्थान में सफाईकर्मियों के 11 करोड़ रुपए का गबन! पीएम के दखल के बाद आया सामने

राजस्थान में पीएम माेदी के दखल के बाद 11 करोड़ रुपए का कथित घोटाला सामने आया है।

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pm narendra modi latest news

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जयपुर। सफाई कर्मचारियों की भविष्य निधि के 23 करोड़ रुपए हड़पने के बाद बीमा राशि के करीब 11 करोड़ रुपए का कथित घोटाला सामने आया है। नगर निगम के करीब 5 हजार अस्थाई सफाईकर्मियों का यह पैसा है, जिसे अनुबंधित कंपनियों ने सरकार को जमा ही नहीं कराया।

पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल ने प्रधानमंत्री को इसकी जानकारी दी और फिर जांच शुरू हुई। इसके बाद नगर निगम और उससे जुड़ी 8 अनुबंधित कंपनियों का सफाई कर्मचारियों का हिस्सा राशि हड़पने का मामले का खुलासा हुआ। इसमें सर्विस टैक्स मिलाकर यह आंकड़ा अब तक करीब 70 करोड़ रुपए तक पहुंचने की आशंका जताई गई है।

इसी मामले में ज्योति खंडेलवाल शुक्रवार को महापौर अशोक लाहोटी से मिलने निगम मुख्यालय पहुंचीं। उन्होंने कर्मचारियों के हक का पैसा दिलाने और जिम्मेदार कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। इस दौरान दोनों के बीच बहस भी हो गई।

दोनों एक-दूसरे को जिम्मेदारी याद दिलाते हुए हावी होते रहे। मामला बढ़ा तो पूर्व महापौर के पति शरद खंडेलवाल व अन्य लोगों ने मामला संभाला। इस दौरान भाजपा पार्षद अनिल शर्मा ने जरूर इस मामले में निगम की जिम्मेदारी की बात कही। इससे खंडेलवाल की बात को बल मिलता नजर आया।

यह हुई बातचीत
- पूर्व महापौर : वर्षों से सफाई कर्मचारियों के साथ धोखा होता रहा। भविष्य निधि संगठन व कर्मचारी राज्य बीमा निगम ने भी इस पर मुहर लगाई, फिर निगम कंपनियों पर कार्रवाई नहीं कर रहा।

- महापौर : क्या यह सब इस बोर्ड के कार्यकाल में ही हुआ है, पहले नहीं।
- पूर्व महापौर : मेरे कार्यकाल में शुरू हुआ। इसकी जानकारी मिलते ही अफसरों से लेकर सरकार तक को एक्शन लेने के लिए कहा। प्रधानमंत्री से भी मिली लेकिन आपने कुछ नहीं किया। बल्कि ट्रिब्यूनल से स्टे ले आए।

- महापौर : वित्तीय सलाहकार को कहा कि ज्योति खंडेलवाल की ओर से लिखी गई नोटशीट व अन्य दस्तावेज निकालवाओ, पता करेंगे कि क्या किया था।
- पूर्व महापौर : सौहार्द्र तरीके से कार्रवाई के लिए कह रही हूं और आप माहौल को बिगाड़ रहे हैंं।

- महापौर : मैं तो यही कह रहा हूं कि जब आपके कार्यकाल में यह काम शुरू हुआ तो उसकी भी पड़ताल करनी होगी।
- पूर्व महापौर : अफसर सब कुछ जनप्रतिनिधि या महापौर को बताते कहां हैं। अंदरखाने यह चलता रहा और जब पता चला तो मामला उठाया।

- महापौर : ऐसे कैसे हो सकता है कि लम्बे समय से चह चलता रहा और देर से पता चला।