मुलाकात के बाद दिव्या मदेरणा ने जो पंक्तियां लिखीं, उन्हें उनके आगामी राजनीतिक सफर के लिए एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने लिखा, "विश्व शांति और मानवता के प्रतीक दलाई लामा से मिला यह आशीर्वाद मुझे हमेशा याद दिलाएगा कि सार्वजनिक जीवन का सबसे बड़ा धर्म सत्ता नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और मानवता है।"