
Sharad Purnima 2023
दिवाली से पहले आकाशीय मंडल में खगोलीय घटनाएं होंगी। सूर्यग्रहण के साथ ही चंदग्रहण का साया इस बार विशेष रहेगा। 33 साल बाद आश्विन शुक्ल शरद पूर्णिमा को मध्यरात्रि में खंडग्रास चंद्रग्रहण रहेगा। यह ग्रहण भारत के संपूर्ण भूभाग के साथ ही अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, यूरोप और एशिया के समस्त भूभाग में दिखाई देगा। ज्योतिषविदों के अनुसार 28 अक्टूबर को मध्यरात्रि बाद रात 1 बजकर 5 मिनट से चंद्रग्रहण शुरू होकर 2.23 बजे तक यानि 1 घंटे 18 मिनट ग्रहण की अवधि रहेगी। ग्रहण के मध्यकाल में रात 1.44 बजे चंद्रमा की रोशनी 13 प्रतिशत कम यानि ग्रहण युक्त चंद्रमा नजर आएगा। जबकि सूतक शाम 4 बजकर 5 मिनट से ही शुरू हो जाएगा। सन 1986 में मध्यरात्रि में ग्रहण लगा था।
शहरवासी इस बार असमंजस में है कि खीर का भोग कैसे लगेगा। इधर, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शरद पूर्णिमा पर व्रत, दान पुण्य का महत्व बताया है जबकि आयुर्वेद के हिसाब से शरण पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा की चांदनी में अमृत का निवास रहता है। इसलिए उसकी किरणों में अमृत्व और आरोग्य की प्राप्ति सुलभ होती है। इसलिए खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा है।
नहीं रखी जा सकेगी खीर
ज्योतिषाचार्य पं.दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि चंद्रग्रहण देर रात होने से इस साल शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की धवल रोशनी में खीर नहीं रखी जा सकेगी। वहीं मंदिरों में भी उत्सव दोपहर में ही होंगे। ठाकुर जी सुबह ही धवल पोशाक में दर्शन देंगे। शाम को सूतक काल के समय से कीर्तन आदि का दौर शुरू होगा। भगवान के पट मंगल रहेंगे। जरूरतानुसार इस रात चांदनी में खीर ग्रहण के मोक्ष के बाद 2.33 बजे पूजा अर्चना, स्नान आदि के बाद रखी जा सकती है।
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शरद पूर्णिमा पर खीर कब रखें
ज्योतिषाचार्य पं.दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि मान्यता है कि चंद्रमा से अमृत गिरने की अवधि ब्रह्म बेला में मानी गई है। अस्थमा रोगियों के लिए खीर का सेवन औषधि के समान माना है। सूतक प्रारंभ हो जाने के बाद बालक, वृद्ध व रोगियों को छोड़कर धार्मिकजन को भोजन आदि नहीं करना चाहिए। विशेष स्थिति में खीर बनाकर पूर्व दिन की रात्रि में रखकर 28 को सुबह वितरित किया जा सकता है।
यह रहेगा असर
ज्योतिषाचार्य पं.पुरुषोत्तम गौड़ ने बताया कि सूतक शाम को शुरू होने से दिन में ही भगवान का अभिषेक, पूजन अनुष्ठान करें। चंद्रग्रहण अश्विनी नक्षत्र व मेष राशि में घटित हो रहा है। अतः अश्विनी नक्षत्र व मेश राशि में उत्पन्न लोगों को विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।
14 अक्टूबर को कंकण सूर्यग्रहण
14 अक्टूबर को सर्व पितृ अमावस्या के मौके पर कंकण सूर्यग्रहण होगा। लेकिन यह ग्रहण भारत में अदृश्य रहेगा।
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Updated on:
07 Oct 2023 10:32 am
Published on:
07 Oct 2023 10:31 am
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