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सदन में पारित करवाओ विधानसभा-लोकसभा चुनाव साथ करवाने का प्रस्ताव, भाजपा ने अपने सभी CM को लिखा पत्र

भाजपा देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की रणनीति में जुट गई है।

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अरविन्द सिंह शक्तावत/जयपुर। भाजपा देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की रणनीति में जुट गई है। इसकी शुरुआत भाजपा शासित राज्यों और लोकसभा चुनावों को साथ कराने के साथ हो सकती है।

भाजपा ने अपने सभी मुख्यमंत्रियों को निर्देश दे दिए हैं कि वे राज्य में कमेटी का गठन कर इस काम में जुट जाएं। दिल्ली में बुधवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हो रही भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में एक साथ चुनाव कराने के विषय पर चर्चा होगी। राज्य की विधानसभाओं से प्रस्ताव पारित करने के निर्देश भी मुख्यमंत्रियों को दे दिए गए हैं।

यह है पत्र में
भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्रियों को दिए पत्रि में कहा है कि विधानसभा एवं लोकसभा के एक साथ चुनाव का विचार चल रहा है। इसके लिए प्रदेश में एक टीम का गठन कर उसकी रिपोर्ट भाजपा आलाकमान को भेज दी जाए। पत्र में कहा गया है कि आज कल चुनाव जीतना ही राजनीति का लक्ष्य बन गया है। इस कारण देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की मांग जोर पकड़ रही है। प्रधानमंत्री भी इस बारे में बोल चुके हैं और इसके सकारात्मक संकेत आए हैं। जिन राज्यों में भाजपा की सरकार है, वहां चुनाव एक साथ कराने की संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहिए।

इसलिए बताया जरूरी
- सुशासन राजनीति का केन्द्र बिंदू बने।
- संसाधनों के अनावश्यक अपव्यय को रोकना।
- राजनीति में भ्रष्टाचार पर नियंत्रण।
- सुरक्षाबलों का लम्बे समय तक चुनावी उपयोग के कारण देश की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रभाव।
- राजनीति में कालेधन के प्रभाव को कम करना।

- नियमित चुनाव से सामाजिक वर्गीकरण, भेदभाव व बंटवारे की राजनीति के कारण सामाजिक सोहाद्र्र पर प्रभाव।
- राजनीतिज्ञों के लोकतांत्रिक दायित्वों में वृद्धि।
- देश में राजनीति स्थिरता की ओर मजबूती का कदम।

यह काम करेंगे मुख्यमंत्री
- राज्य के सभी दलों के प्रभावी नेताओं के साथ सहमति का वातावरण तैयार करना।
- राज्य के प्रमुख क्षेत्रीय दलों में इसके लिए सहमति का वातावरण तैयार करना।
- विधानसभा में इस विषय पर सकारात्मक चर्चा करना एवं प्रस्ताव पारित कराना।
- नीति आयोग एवं संसदीय समिति की रिपोर्ट को पार्टी एवं सरकार के माध्यम से चर्चा में लाना।
- छात्रों एवं युवाओं के बीच इस विषय को युवा संसद एवं डिबेट के माध्यम से उठाना।
- सोशल मीडिया के माध्यम से जनता के बीच जानकारी देना।
- राज्य के मुख्य सचिव, प्रमुख अधिकारी एवं एक मंत्री की समिति बनाकर इस काम को आगे बढ़ाना।
- प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री जो इस विचार को राजनीतिक रूप से आगे बढ़ा सकते हैं, उनकी टीम का गठन करना।