
प्रतीकात्मक तस्वीर, मेटा एआइ
Rajasthan Smart Policing: जयपुर। राजस्थान पुलिस पारंपरिक से आगे तकनीक आधारित स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रही है। इसी कड़ी में राजकॉप ऐप अपराधियों की धरपकड़, कानून-व्यवस्था के संधारण और मानवीय मामलों के समाधान में पुलिस के लिए एक प्रभावी हथियार साबित हो रहा है।
नाकाबंदी, गश्त या किसी भी संदिग्ध गतिविधि के दौरान केवल एक फोटो के जरिये पुलिस को व्यक्ति का आपराधिक इतिहास उपलब्ध हो जाना, इस तकनीक की बड़ी ताकत बनकर उभरा है।
राजकॉप ऐप की विशेषता इसका फेस रिकग्निशन फीचर है। नाकाबंदी या जांच के दौरान संदिग्ध व्यक्ति की फोटो लेते ही ऐप उसे डिजिटल पुलिस डेटाबेस से मिलान करता है। कुछ ही सेकंड में यह सामने आ जाता है कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कितने मामले दर्ज हैं, वह कितनी बार जेल जा चुका है। किस अपराध में सजा हुई और अन्य राज्यों में उसका आपराधिक रिकॉर्ड क्या रहा है। यह पूरी जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध हो जाती है।
हाल ही धौलपुर के बाड़ी कस्बे में वाहनों व संदिग्धों की जांच की जा रही थी। इसी दौरान थानाधिकारी देवेंद्र शर्मा के नेतृत्व में टीम ने एक संदिग्ध वाहन चालक को रोका गया। राजकॉप ऐप के फोटो मिलान फीचर से सत्यापन करने पर उसकी पहचान सचिन शर्मा निवासी आंगई, धौलपुर के रूप में हुई। डिजिटल रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी के खिलाफ जयपुर के सिंधी कैंप थाने में अवैध हथियार रखने का मामला दर्ज होना पाया गया, जिसकी पुष्टि आरोपी ने भी की।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार राजकॉप ऐप सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स) के माध्यम से अखिल भारतीय पुलिस डेटाबेस से जुड़ा है। इसकी रियल-टाइम डेटा एक्सेस सुविधा नाकाबंदी और गश्त के दौरान पुलिस को तुरंत निर्णय लेने में सक्षम बनाती है। बताया जाता है कि उन्नत फेस रिकग्निशन तकनीक हुलिया बदलने की स्थिति में भी सटीक पहचान कर लेती है।
राजकॉप ऐप गुमशुदा व्यक्तियों, लावारिस बच्चों और अज्ञात शवों की शिनाख्त में भी अहम भूमिका निभाएगा। फोटो के माध्यम से डेटाबेस मिलान कर परिजन तक पहुंचना अब पहले की तुलना में कहीं आसान हो गया है।
Published on:
01 Mar 2026 11:50 pm
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