
सुप्रीम कोर्ट। पत्रिका फाइल फोटो
जयपुर। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के धर्मान्तरण विरोधी कानून को चुनौती देने वाली चौथी याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब इस मामले पर उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, छत्तीसगढ़, हरियाणा और झारखंड के समान कानूनों से संबंधित याचिकाओं के साथ सुनवाई होगी।
न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायाधीश संदीप मेहता की खंडपीठ ने पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज़ की याचिका पर यह आदेश दिया। याचिका में राजस्थान प्रोहिबिशन ऑफ अनलॉफल कन्वर्ज़न ऑफ रिलीजन एक्ट-2025 को चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया है कि यह कानून संविधान के विपरीत है और इसमें कई धाराओं को चुनौती दी गई है।
याचिका में यह आरोप भी लगाया गया कि यह कानून व्यक्तिगत आस्था पर अत्यधिक सरकारी नियंत्रण लगाता है, अधिकारियों को पूर्व-नोटिस देने की बाध्यता करता है, वहीं पुलिस को अनावश्यक रूप से दखल देने के अधिकार प्रदान करता है। राजस्थान सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने देशभर में इस तरह के कानून से संबंधित सभी याचिकाओं की विस्तृत सूची पेश की।
सुप्रीम कोर्ट इससे पहले दशरथ कुमार हिनुनिया व अन्य, एम. हुजैफा व अन्य और जयपुर कैथोलिक वेलफेयर सोसायटी की याचिका पर यह आदेश दे चुका है।
Updated on:
29 Nov 2025 07:22 am
Published on:
29 Nov 2025 07:22 am
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