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15 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 वर्ष का कठोर कारावास, कोर्ट ने लगाया भारी जुर्माना

राजधानी में नाबालिग बच्चियों की सुरक्षा और पोक्सो कानून की गंभीरता को रेखांकित करते हुए जयपुर महानगर प्रथम पोक्सो कोर्ट संख्या-2 ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। ।

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Rajasthan High Court new arrangement in divorce cases Bundi Family Court decision cancelled

फाइल फोटो। पत्रिका

जयपुर। राजधानी में नाबालिग बच्चियों की सुरक्षा और पोक्सो कानून की गंभीरता को रेखांकित करते हुए जयपुर महानगर प्रथम पोक्सो कोर्ट संख्या-2 ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। अदालत ने 15 वर्षीय नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी आकाश उर्फ कान्हा को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

क्या था पूरा मामला

घटना 14 अक्टूबर 2023 को जयपुर के मानसरोवर थाना क्षेत्र में घटित हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी आकाश उर्फ कान्हा ने घर में घुसकर 15 वर्षीय नाबालिग के साथ जबरन दुराचार किया। इतना ही नहीं, जब पीड़िता ने इस कृत्य का विरोध किया तो आरोपी ने उसे डराया-धमकाया और किसी को बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। घटना के बाद पीड़िता के परिजनों ने साहस जुटाकर मानसरोवर थाने में मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया और मामले की गहनता से जांच की। जनवरी 2024 में पुलिस ने कोर्ट में आरोपी के विरुद्ध पुख्ता साक्ष्यों के साथ चार्जशीट पेश की।

अदालत का कड़ा रुख और फैसला

मामले की सुनवाई जयपुर महानगर प्रथम पोक्सो कोर्ट संख्या-2 में मजिस्ट्रेट दीक्षा सूद की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और कड़ी दलीलें पेश की गईं। पीड़िता की ओर से अधिवक्ता धर्मेंद्र कुमार शर्मा और यतेन्द्र कुमार कटारा ने प्रभावी पैरवी की और अपराध की गंभीरता को देखते हुए अधिकतम सजा की मांग की। दोनों पक्षों को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध वैज्ञानिक व मौखिक साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद मजिस्ट्रेट दीक्षा सूद ने आरोपी को दोषी माना।

सजा और आर्थिक दंड का विवरण

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि नाबालिगों के विरुद्ध होने वाले ऐसे अपराध समाज के लिए कलंक हैं। मामले की गंभीरता और पीड़िता की आयु को देखते हुए कोर्ट ने आरोपी के प्रति कोई नरमी नहीं दिखाई और उसे 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा से दंडित किया। यह निर्णय पोक्सो कानून के तहत अपराधियों में भय पैदा करने और न्याय प्रणाली पर जनता का विश्वास सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

जुर्माना और अतिरिक्त कारावास का प्रावधान

कारावास की सजा के साथ-साथ कोर्ट ने दोषी पर 1 लाख रुपये का भारी अर्थदंड भी लगाया है। अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि दोषी इस जुर्माना राशि को जमा करने में विफल रहता है, तो उसे मुख्य सजा के अतिरिक्त 1 वर्ष का साधारण कारावास और भुगतना होगा। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि अपराधी पर न केवल शारीरिक बल्कि आर्थिक दंड का भी प्रभावी दबाव बना रहे।

पीड़िता के लिए प्रतिकर और विधिक निर्देश

पीड़िता के पुनर्वास और मानसिक संबल के लिए मजिस्ट्रेट दीक्षा सूद ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। कोर्ट ने विधिक सेवा प्राधिकरण को आदेश दिया है कि पीड़िता को 2 लाख रुपये की प्रतिकर राशि प्रदान की जाए। इसके साथ ही, स्थानीय विधिक सेवा प्राधिकरण को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि सहायता राशि पहुंचाने की प्रक्रिया में तत्परता बरती जाए ताकि पीड़िता को समय पर न्याय और आर्थिक मदद मिल सके।