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मनीष चतुर्वेदी
जयपुर। पाकिस्तान से हिंदूस्तान में आए शरणार्थियों के बच्चे भटक रहे है। जिन्हें बगैर दस्तावेज शिक्षा लेने तक का अधिकार भारत में नहीं है। कहते हैं कि शिक्षा पर हर बच्चे का समान अधिकार है, लेकिन दस्तावेजों की कमी और नागरिकता के अभाव में कई बार मासूमों का भविष्य अंधकार में डूब जाता है। मानसरोवर इलाके में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा था, जहां पाकिस्तान से आए विस्थापित परिवारों के बच्चे अभावों में जीवन जी रहे थे। लेकिन अब किरण पथ स्थित मां भगवती उच्च प्राथमिक विद्यालय इन बच्चों के जीवन में शिक्षा का उजियारा फैलाने का माध्यम बना है।
शिक्षा विभाग में जिला शिक्षा अधिकारी के पद से रिटायर हो चुके केदार शर्मा अभी माँ भगवती उच्च प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत है। शर्मा झुग्गी झोपड़ियों और कच्ची बस्तियों में गए। वहां इन बच्चों की दुर्दशा देखी तो साक्षर करने की पहल करने का निर्णय लिया। फिर बच्चों को स्कूल लेकर आए। अब इन बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।
प्रधानाचार्य केदार शर्मा का कहना है कि तकनीकी तौर पर वे इन बच्चों को आधिकारिक डिग्री या बोर्ड सर्टिफिकेट तो नहीं दे सकते, क्योंकि उनके पास भारत का कोई वैध दस्तावेज़ नहीं है, लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य इन बच्चों को निरक्षरता के अंधेरे से बाहर निकालना है। उन्होंने कहा कि हमारा मकसद केवल साक्षर बनाना है। हम चाहते हैं कि कोई भी बच्चा अनपढ़ न रहे।
प्रधानाचार्य केदार शर्मा ने बताया कि इन बच्चों के बारे में कलक्टर से लेकर सीएम तक को लेटर लिखा जा चुका है। इनके बारे में अवगत कराया गया है।
इस स्कूल की शुरुआत जुलाई 2024 में मात्र 24 बच्चों के साथ हुई थी, लेकिन आज यहां करीब 250 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इनमें से लगभग 50 बच्चे वे हैं, जो पाकिस्तान से आए शरणार्थी परिवारों से ताल्लुक रखते हैं।
जयपुर में पिछले कई वर्षों से पाकिस्तान से आए कई परिवार है। मानसरोवर इलाके में 50 से अधिक हिंदू शरणार्थी परिवार रह रहे हैं। सालों बीत जाने के बाद भी इन परिवारों को अब तक भारतीय नागरिकता नहीं मिल पाई है। भारतीय पहचान पत्र या नागरिकता प्रमाण पत्र न होने के कारण इन परिवारों के बच्चों के लिए किसी भी सरकारी या निजी स्कूल में दाखिला लेना असंभव हो गया है।
पाकिस्तान से आए इन परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय है। परिवार का पेट पालने के लिए कोई चाय का ठेला लगा रहा है, तो कोई टैक्सी चलाकर या मजदूरी कर गुजर-बसर कर रहा है। ऐसे में बच्चों को पढ़ाना इनके लिए एक 'सपना' मात्र बनकर रह गया था।
स्कूल में पढ़ने वाले सभी 250 बच्चों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। गायत्री मंदिर परिवार के सहयोग से बच्चों को न केवल नि:शुल्क शिक्षा दी जा रही है, बल्कि उनके कपड़े, जूते, किताबें और अन्य पाठ्य सामग्री की व्यवस्था भी पूरी तरह नि:शुल्क की जाती है।
Updated on:
02 Jan 2026 12:00 pm
Published on:
02 Jan 2026 11:43 am
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