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JK Loan Hospital में भर्ती बच्चों के परिजनों को आ रहे खतरनाक कॉल, बच्चों की जान का डर दिखा रहे… केस दर्ज

इस तरह के फोन अस्पताल में भर्ती अन्य बच्चों के परिजनों के पास भी आए और उनको बच्चों के साथ बुरा होने का डर दिखाया गया।

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जयपुर
राजस्थान में बच्चों के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल जयपुर स्थित जे के लोन अस्पताल से बड़ी खबर सामने आई है। अस्पताल में भर्ती बेहद कम उम्र के बच्चों के परिजनों से रुपए मांगे जा रहे हैं नहीं दे रहे हैं तो बच्चों को नुकसान होने की धमकी दी जा रही है। डरे सहमे बच्चों के परिजनों ने अब केस दर्ज कराया है। एसएमएस थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और अब जांच पड़ताल शुरु कर दी गई है। मोबाइल फोन के जरिए रिश्वत मांगी जा रही है और मोबाइल फोन के जरिए ही धमकी दी जा रही हैं।

ऑन लाइन मांग रहे पैसा, नहीं तो बच्चे को नुकसान की धमकी
दौसा जिले के बांदीकुई क्षेत्र में रहने वाले बृज बिहार शर्मा ने एसएमएस अस्पताल थाने में केस दर्ज कराया है। बृज बिहारी ने अपने तीन दिन के बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया। बच्चे को इलाज की जरुरत थी। बच्चे को भर्ती कराकर बृज बिहारी चले गए और परिवार के अन्य लोग वहां मौजूद थे। इस बीच बच्चे के पिता के पास फोन गया कि पांच हजार रुपए नहीं दिए तो बच्चे को नुकसान उठाना पड सकता है। पिता बृज बिहारी ने गौर नहीं किया। उसके बाद दो बार और फोन आए। वापस वार्ड में पहुंचे तो पता चला कि पांच छह लोगों को इसी तरह से फोन आ रहे हैं और डर के मारे कुछ ने तो रुपए तक दे दिए हैं। बाद मे जब मामला बढ़ा तो पुलिस को सूचना दी गई । पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और कई लोगों के बयान भी दर्ज कए हैं।

एसएमएस थाना पुलिस ने बताया कि कुछ लोगों से रुपए मांगने की शिकायत मिली है। बच्चों का इलाज सही तरीके से किया जा रहा है। इलाज से परिवार के लोग संतुष्ट हैं। फोन करने वाले खुद को डॉक्टर और स्टाफ बता रहे हैं। वापस उस नंबर पर फोन किया जाता है तो वह या तो बंद मिलता है या फिर कोई फोन पिक नहीं करता। अब पुलिस आईडी के जरिए पहचान करने की कोशिश कर रही है। लेकिन पुलिस का मानना है कि इसके बहुत हद तक चांस है कि आईडी भी फर्जी हो सकती है। उधर जेके लोन प्रशासन ने बच्चों के परिजनों को किसी को भी किसी भी तरह का पैसा नहीं देने की बात कही है।

हमने सोचा सरकार ने कोई नई योजना निकाली है नवजात बच्चों के लिए... खुशी हुई फोन आया तो
दौसा निवासी बृह मोहन ने पुलिस को बताया कि पहली बार चार दिन पहले फोन आया था जिस दिन बच्चे को भर्ती कराया गया था। फोन करने वाले ने खुद को डॉक्टर बताया और पहले बच्चे के बारे में जानकारी ली। मुझे भी ताज्जुब हुआ कि डॉक्टर फोन पर जानकारी ले रहे हैं। हमने सोचा कि सरकार ने नवजात बच्चों के लिए कोई नया नियम बनाया होगा। लेकिन उसके बाद उन्होनें रुपए मांगे। फोन कट गया।

बाद में फिर तीन चार बार फोन आए तीन चार दिन में। जब इस बारे मं वार्ड के इंजार्च डॉक्टर्स से बात की तो वो भी चौंक गए। उन्होनें कहा कि किसी को भी किसी तरह का पैसा नहीं देना हैं। इस तरह के फोन अस्पताल में भर्ती अन्य बच्चों के परिजनों के पास भी आए और उनको बच्चों के साथ बुरा होने का डर दिखाया गया।

अंदर का आदमी मिले होने की संभावना
एसएमएस थाना पुलिस ने बताया कि फिलहाल मामले की जा रही हैं । कई बच्चों के परिजनों के बयान दर्ज किए हैं। एक ही केस में बयान लिए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि इसकी बहुत हद तक संभावना है कि अस्पताल प्रशासन का ही कोई व्यक्ति मिला हुआ हो और उसने बच्चों के परिजनों के नंबर शेयर किए हों। इसकी भी जांच कर रहे हैं। एसएमएस थाना थानाधिकारी नवरतन धोलिया का कहना है कि फिलहाल जांच पड़ताल कर रहे हैं। जल्द ही गैंग पकड ली जाएगी।

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