24 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Transgender Act Amendment: ट्रांसजेंडर अधिनियम में बदलाव के खिलाफ जयपुर से उठी आवाज, जानें क्या है पूरा विवाद

Transgender Act: जयपुर की ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट पुष्पा माई ने ट्रांसजेंडर अधिनियम 2019 के संशोधनों को कोर्ट में चुनौती दी। याचिका में कहा गया कि नए प्रावधान पहचान और समानता के अधिकार के खिलाफ हैं।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

जयपुर

•

image

Arvind Rao

•

Updated: 21 Apr 2026, 12:37 PM IST

Transgender Activist Pushpa Mai Files Petition Against Amendments to Transgender Act

ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट पुष्पा माई (फोटो सोशल मीडिया)

Transgender Act Amendment: जयपुर की एक ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट ने वह काम कर दिखाया, जो बहुत कम लोग कर पाते हैं। पुष्पा माई ने ट्रांसजेंडर अधिनियम 2019 में किए गए हालिया संशोधनों के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की है। उनका कहना है कि ये बदलाव ट्रांसजेंडर समुदाय की पहचान और आजादी को छीनने वाले हैं।

एडवोकेट मितुल जैन के जरिए दायर इस याचिका में सीधे तौर पर कहा गया है कि संशोधित कानून के कुछ प्रावधान संविधान की मूल भावना के खिलाफ हैं। खासतौर पर पहचान प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया को इतना उलझा दिया गया है कि एक आम ट्रांसजेंडर व्यक्ति के लिए यह काम पहाड़ चढ़ने जैसा हो गया है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि ये संशोधन समुदाय की अपनी पहचान तय करने की आजादी को कम करते हैं। साथ ही समानता के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की दुहाई

याचिका में सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया गया है, जो 2014 में NALSA बनाम भारत संघ मामले में आया था। उस फैसले में देश की सबसे बड़ी अदालत ने साफ कहा था कि हर ट्रांसजेंडर व्यक्ति को अपनी पहचान खुद तय करने का हक है। याचिका में तर्क है कि हालिया संशोधन उसी फैसले की भावना को कमजोर करते हैं।

पुष्पा माई की दो टूक

पुष्पा माई ने इस मामले पर बेबाकी से कहा कि यह याचिका सिर्फ एक कानून के खिलाफ नहीं, बल्कि उस पूरी सोच के खिलाफ है जो ट्रांसजेंडर लोगों के वजूद को ही सवालों के घेरे में रखना चाहती है। उन्होंने कहा कि कानून का काम समुदाय को सुरक्षा देना है न कि उनकी जिंदगी को और मुश्किल बनाना।

आगे की उम्मीद

CBO ने इस कदम को समुदाय के हक की लड़ाई में एक जरूरी मोड़ बताया है। संस्था को उम्मीद है कि अदालत इस मामले को संवेदनशीलता से देखेगी और संविधान की रोशनी में फैसला देगी। यह मामला सिर्फ एक याचिका नहीं है। यह उन लाखों लोगों की आवाज है, जो अपनी पहचान के लिए रोज लड़ते हैं।

बड़ी खबरें

View All

जयपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग