
PIC - Rajasthan BJP
राजस्थान की राजनीति में 'दिग्गजों का मिलन' आज चर्चा का विषय बना रहा। भाजपा स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेश मुख्यालय में आयोजित विशेष संगोष्ठी में पुरानी कड़वाहटें भुलाकर पार्टी के तीन कद्दावर नेता- वसुंधरा राजे, डॉ. घनश्याम तिवाड़ी और डॉ. किरोड़ी लाल मीणा एक साथ नजर आए। यह नजारा इसलिए खास था क्योंकि ये तीनों नेता वसुंधरा राजे के पिछले कार्यकाल में न केवल मंत्री रह चुके हैं, बल्कि समय-समय पर इनके बीच भारी वैचारिक और राजनीतिक टकराव भी देखा गया है।
जैसे ही ये तीनों नेता एक साथ मंच पर बैठे, कार्यकर्ताओं की तालियों ने हॉल गुंजायमान कर दिया। वसुंधरा राजे ने अपने संबोधन की शुरुआत ही इन दोनों दिग्गजों के विशेष उल्लेख के साथ की। राजे के अंदाज में पुरानी कड़वाहट की जगह अब 'अनुभव' और 'सम्मान' की झलक साफ दिखाई दे रही थी।
घनश्याम तिवाड़ी, जो कभी वसुंधरा राजे के प्रबल विरोधी रहे और पार्टी तक छोड़ दी थी, आज उनके साथ मुस्कुराते हुए मंच पर थे। वसुंधरा ने उनके बारे में कहा: "मेरे साथ, मेरे सहयोगी, कई सालों तक मेरे मंत्रिमंडल में साथ रहे भी, लड़े भी... बड़ी लंबी हिस्ट्री है, जिसकी बहुत प्यारी शक्ल अभी आपको दिखाई दे रही है.. हमारे घनश्याम जी तिवाड़ी।" राजे की इस बात पर तिवाड़ी भी मुस्कुरा उठे और हॉल में हंसी के फव्वारे छूट गए।
राजस्थान की राजनीति के 'बाबा' कहे जाने वाले डॉ. किरोड़ी लाल मीणा और वसुंधरा राजे के बीच का रिश्ता भी किसी रोलर-कोस्टर राइड से कम नहीं रहा है। किरोड़ी लाल मीणा पर टिप्पणी करते हुए राजे ने कहा, "किरोड़ी जी के साथ भी खूब अप्स एंड डाउन्स (उतार-चढ़ाव) देखे हैं।"
उनके इस बयान ने उन दिनों की याद दिला दी जब किरोड़ी लाल मीणा ने पार्टी से अलग होकर अपनी राह चुनी थी, लेकिन आज वे फिर से संगठन की मजबूती के लिए एक ही कतार में खड़े हैं।
संगोष्ठी के दौरान इन तीनों नेताओं का एक साथ आना राजस्थान भाजपा के लिए एक बड़ा सकारात्मक संकेत माना जाता है।
यह तस्वीर बताती है कि स्थापना दिवस पर भाजपा के शीर्ष नेता 'गुटबाजी' को पीछे छोड़कर एक मंच पर आ रहे हैं।
तिवाड़ी का वैचारिक पक्ष, किरोड़ी का जमीनी संघर्ष और वसुंधरा का नेतृत्व अनुभव पार्टी के लिए 'ट्रिपल पावर' जैसा है।
पार्टी मुख्यालय में मौजूद कार्यकर्ताओं के लिए यह दिन ऐतिहासिक रहा। नेताओं के बीच की इस 'हल्की-फुल्की जुगलबंदी' ने यह संदेश दिया है कि राजनीति में कोई स्थाई दुश्मन नहीं होता और संगठन का हित सबसे ऊपर है। इन तीनों नेताओं ने अपने भाषणों में एक-दूसरे का नाम लेकर पुरानी यादें साझा कीं, जो यह दर्शाता है कि अब वे एक नई ऊर्जा के साथ प्रदेश में भाजपा को मजबूत करने में जुटे हैं।
Updated on:
06 Apr 2026 04:05 pm
Published on:
06 Apr 2026 04:04 pm
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