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रुपए की कमजोरी से धराशायी हुआ राज्य का निर्यात
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रुपए की कमजोरी से धराशायी हुआ राज्य का निर्यात

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राजस्थान के मार्बल, ज्वैलरी, हैंडीक्राफ्ट और कपड़ा उद्योग की बढ़त ज्यादातर निर्यात पर निर्भर करती है। लेकिन रुपए की लगातार गिरावट ने इन उद्योगों को मंदी की ओर धकेल दिया है। डॉलर की मजबूती ने विदेशी बायर्स की डिमांग को घटा दिया है, जिससे वे एक्सपोर्ट आर्डर की कीमतें घटाने की मांग कर रहे हैं और ,,ऐसा नहीं करने पर आर्डर कैंसल करने की धमकी दे रहे हैं। रुपए की मंदी इस वित्त वर्ष में राज्य के उद्योगों को 15 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान पहुंचा सकती है।
72 के पार पहुंचे डॉलर ने देश में सबसे ज्यादा राजस्थान के उद्योगों को झटका दिया है, क्योंकि यहां के ज्यादातर उद्योग निर्यात आधारित हैं। राज्य के मार्बल उद्योग में घरेलू के साथ-साथ विदेशी डिमांड भी लगभग खत्म हो चुकी है। राज्य में रियल एस्टेट की मंदी ने मार्बल उद्योग की बिक्री को 30 फीसदी तक घटा दिया था और अब रुपए के गिरते मूल्य से मार्बल उद्योग को भारी नुकसान हो रहा है। राजस्थान से गत वर्ष 14 हजार करोड़ रुपए का ग्रेनाइट और मार्बल एक्सपोर्ट हुआ था, जो इस साल घटकर 10 हजार करोड़ रह सकता है, जिसकी प्रमुख वजह भारी संख्या में आर्डर्स का कैंसेल होना है।
वहीं हैंडीक्राफ्ट के कारोबारियों का कहना है कि डॉलर की तेजी से विदेशी बायर्स कीमतें घटाने की मांग कर रहे हैं, जबकि देश में महंगाई चरम पर है और ऐसे में विदेशी आर्डर बायर्स की रेट में पूरा करना नामुमकिन है। इससे आर्डर कैंसेल होने का खतरा भी मंडरा रहा है। इस साल सालाना एक्सपोर्ट में डॉलर के बढऩे से कमी तो नहीं आएगी, लेकिन आर्डर्स की संख्या जरूरी घटेगी। पेट्रोल-डीजल की महंगाई ने हैंडीक्राफ्ट में काम आने वाले फैब्रिक की कीमतें बढ़ा दी हैं, जिससे इस उद्योग को तय कीमत में आर्डर पूरा करने में परेशानी आ रही है।

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