
भीषण आग में जलती दुकानें (पत्रिका फोटो)
Jaipur News: जयपुर के बड़ी चौपड़ स्थित पुरोहित जी के कटले में गुरुवार को लगी भीषण आग ने सिर्फ दर्जनों दुकानों और गोदामों को खाक नहीं किया, बल्कि जयपुर के परकोटे की सुरक्षा व्यवस्था और पिछले करीब तीन दशक से चल रही कवायद पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह पहला मौका नहीं है जब परकोटे में आग ने तंग गलियों, घनी आबादी, अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों के बीच दमकल व्यवस्था की सीमाएं उजागर की हों। फर्क सिर्फ इतना है कि हर बड़ी घटना के बाद कार्रवाई के दावे होते हैं, लेकिन कुछ समय बाद हालात फिर उसी ढर्रे पर लौट आते हैं।
परकोटे में आवासीय भवनों के व्यावसायिक इस्तेमाल, अवैध निर्माण और वॉल सिटी के मूल स्वरूप को बचाने का मामला लंबे समय से अदालतों तक पहुंचता रहा है। सेशन कोर्ट से लेकर राजस्थान हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक विभिन्न मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप हुआ। हाईकोर्ट में अवैध व्यावसायिक उपयोग और निर्माण वाले भवनों की सूचियां भी पेश की गईं। कार्रवाई के आदेश और प्रशासनिक रिपोर्ट भी सामने आती रहींए लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई।
आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर काम कर रहे अश्विनी तिवारी ने बताया कि कार्रवाई की शुरुआत करीब 50 इमारतों से हुई थी, सूची खुद कोर्ट में निगम ने पेश की थी। लेकिन समय के साथ ऐसी इमारतों की संख्या 300 से अधिक तक पहुंचने की बात सामने आई। सघन आबादी वाले परकोटे में बहुत जगह आवासीय भवनों में दुकानए गोदामए रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। पुरोहित जी के कटले की आग ने इसी व्यवस्था की सबसे खतरनाक तस्वीर सामने रख दी।
कोर्ट की फटकार के बाद निगम ने कोर्ट में एक नहीं चार लिस्ट पेश की। इन लिस्टों में जानकारी थी कि किन जगहों पर कौन सा निर्माण अवैध है। इन लिस्टों में रामगंज बाजार, घाटगेट, हल्दियों का रास्ता, मनीराम जी की कोठी, घीवालो का रास्ता, गंगापोल रोड, पदमपुरा हाउस और चांदी की टकसाल जैसे हिस्सों में आंशिक रूप से अवैध निर्माणों की पहचान की गई है। वहीं तीसरे चरण में नाहरगढ़ रोड, रामगंज, गंगापोल, गोवर्धनपुरी, टीपी नगर और लक्ष्मीनारायणपुरी समेत कई अन्य स्थानों पर बड़े पैमाने पर अवैध निर्माणों की सूची बनाई गई है, जिन पर दूसरे चरण के पश्चात 6 महीने के भीतर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। हांलाकि कार्रवाई किसी पर भी नहीं हुई।
इस पूरे मामले को 13 साल पहले उठाने वाले बड़ी चौपड़ निवासी अश्विनी तिवारी ने बताया कि जयपुर का मूल स्वरूप वापस लौटाने के लिए 13 साल से काम कर रहे हैं। कोर्ट ने हमारे मामले में प्रसंज्ञान लिया, उसके बाद निगम और सरकार को कई फटकार लगाई। निगम ने कई बार में कोर्ट में करीब चार सौ से भी ज्यादा ऐसे निर्माणों की सूची दी जिनमें अवैध निर्माण, आवासीय में व्यवसायिक निर्माण हुए। कोर्ट ने नष्ट करने के लिए भी निर्देश दिए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। नतीजा पुरोहित जी के कटले में लगी आग के तौर पर सबके सामने है। इस विषय को लेकर कल भी कोर्ट में तारीख है।
Updated on:
18 Sept 2026 10:56 am
Published on:
18 Sept 2026 10:56 am
