
कोहरे को चीरते हुए रोजमर्रा के कामकाज पर निकलता शख्स।
Western Disturbance: जयपुर. फरवरी के मध्य में उत्तर-पश्चिम भारत के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ मध्य एवं ऊपरी क्षोभमंडलीय पछुआ पवनों में द्रोणी के रूप में सक्रिय है, जबकि उपोष्णकटिबंधीय पछुआ जेट स्ट्रीम उत्तर-पूर्व भारत के ऊपर तेज गति से बह रही है। इसी बीच मौसम विभाग के अनुसार दो नए पश्चिमी विक्षोभ क्रमिक रूप से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित करेंगे—पहला 13 फरवरी से और दूसरा 16 फरवरी 2026 से सक्रिय होगा। यही दोनों सिस्टम आने वाले दिनों में मौसम की दिशा तय करेंगे।
इन विक्षोभों के प्रभाव से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश व बर्फबारी बढ़ने की संभावना है। ऊंचाई वाले इलाकों में ताजा हिमपात से ठंड दोबारा तेज होगी और शीतलहर जैसे हालात बन सकते हैं। इसका असर मैदानी क्षेत्रों—पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश—तक पहुंचेगा, जहां बादल छाए रहने, हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर देखने को मिल सकता है।
राजस्थान पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा, खासकर उत्तरी व पश्चिमी जिलों में बादल छाने, बूंदाबांदी या हल्की वर्षा की संभावना है। दिन के तापमान में गिरावट आएगी और मौसम सुहावना लेकिन ठंडा रह सकता है।
कुल मिलाकर, इन दोनों पश्चिमी विक्षोभों से मौसम में अस्थिरता, तापमान में गिरावट और वर्षा गतिविधियों में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।
Published on:
11 Feb 2026 03:26 pm
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