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जयपुर फैमिली कोर्ट की शर्मनाक व्यवस्था! महिला टॉयलेट पर ताला, पुरुष शौचालय में जाने को मजबूर महिलाएं

Jaipur Family Court: जयपुर के गांधीनगर मोड़ स्थित फैमिली कोर्ट परिसर में महिलाओं के बुनियादी अधिकारों और प्राइवेसी की धज्जियां उड़ रही हैं। परिसर में 5 कोर्ट और राज्य महिला आयोग कार्यालय होने के बावजूद महिलाओं के लिए अलग टॉयलेट की उचित व्यवस्था नहीं है। महिला टॉयलेट पर ताला लटका है और तीसरी मंजिल का शौचालय गंदगी से बदहाल है।
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जयपुर

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Arvind Rao

Jul 23, 2026

Jaipur Family Court News

पुरुष शौचालय में जाने को मजबूर महिलाएं (फोटो- दिनेश डाबी)

Jaipur Family Court News: जयपुर: न्याय की चौखट पर उम्मीद लेकर पहुंचने वाली महिलाओं को फैमिली कोर्ट में हर दिन घोर मानसिक संताप और असम्मान का सामना करना पड़ रहा है। गांधीनगर मोड़ स्थित इस भवन में पारिवारिक न्यायालय के पांच कोर्ट संचालित हैं। जहां तलाक और गुजारा भत्ता जैसे संवेदनशील मामलों की सुनवाई होती है। साथ ही इसी परिसर में राज्य महिला आयोग का कार्यालय भी संचालित होता है।

बता दें कि कोर्ट परिसर में रोजाना वकील और पक्षकारों सहित करीब एक हजार लोग आते हैं, जिनमें महिलाएं बड़ी संख्या में होती हैं। इसके बावजूद परिसर में महिलाओं के लिए अलग व्यवस्था न होने के कारण उन्हें पुरुषों के साथ एक ही शौचालय का इस्तेमाल करने को मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे उनकी प्राइवेसी और सुरक्षा दांव पर लगी है। परिसर में महिलाओं के लिए बना दूसरा शौचालय ताले में बंद पड़ा है।

महिलाओं के टॉयलेट में लगा ताला

हैरानी की बात यह है कि भवन में मौजूद महिला आयोग का टॉयलेट भी ताले में कैद है। हालांकि, तीसरी मंजिल पर एक शौचालय उपलब्ध है। लेकिन वहां पसरी गंदगी के कारण उसका उपयोग करना मुश्किल हो रहा है।

तस्वीरों में क्या दिख रहा?

तस्वीर को गौर से देखने पर दिखेगा कि भीतर पुरुष खड़े हैं और महिला दरवाजे की चौखट पर पुरुषों की तरफ पीठ किए खड़ी है। वह मजबूरी में इस इंतजार में बाहर खड़ी है कि कब पुरुष बाहर निकलें और उसे जगह मिले।

महिलाओं को अपनी प्राइवेसी खोने का डर

उसकी आंखों में झिझक है, चेहरे पर संकोच है और दिल में अपनी 'प्राइवेसी' खोने का डर। यह कोई मामूली असहजता नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता पर करारा तमाचा है। सवाल सीधा है, जहां इंसाफ की गुहार लगाई जाती है, क्या वहां एक महिला को अपनी बुनियादी मर्यादा के लिए भी इस तरह बेबस होना पड़ेगा?