
जयपुर. भारत सरकार शिक्षा को भविष्य-उन्मुख बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) 2026-27 शैक्षणिक सत्र से कक्षा 3 से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग को स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल करने जा रहा है। यह बदलाव रट्टा-आधारित शिक्षा से हटकर गेम, पजल और एक्टिविटी के जरिए बच्चों को सोचने-समझने की क्षमता विकसित करने पर जोर देगा। लेकिन वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट ‘From Prospectiveto Prepared Teacher’ ने इस महत्वाकांक्षी योजना पर एक बड़ी चेतावनी दी है।
रिपोर्ट के अनुसार, भले ही सरकारें नए इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी पर करोड़ों रुपए खर्च कर दें, अगर टीचर्स को उचित ट्रेनिंग नहीं दी गई तो पूरी शिक्षा व्यवस्था फेल हो सकती है। रिपोर्ट साफ कहती है – “एजुकेशन सिस्टम उतना ही अच्छा परफॉर्म करेगा, जितने अच्छे उसके टीचर्स होंगे।”
रिपोर्ट में भारत समेत कई देशों की टीचर एजुकेशन व्यवस्था की आलोचना की गई है। इसमें कहा गया है कि टीचर ट्रेनिंग ज्यादातर थ्योरी-आधारित होती है, प्रैक्टिकल अनुभव की भारी कमी है और ट्रेनिंग यूनिवर्सिटी या कॉलेज तक सीमित रह जाती है।
AI जैसे उन्नत विषय को पढ़ाने के लिए टीचर्स को अब सूचना देने वाले की बजाय ‘फैसिलिटेटर’ (मार्गदर्शक) की भूमिका निभानी होगी। उन्हें एडप्टिव लर्निंग, AI टूल्स का इस्तेमाल, क्रिटिकल थिंकिंग और टेक-सैवी बनना होगा।
देश में एक करोड़ से ज्यादा टीचर्स हैं। इन्हें AI पढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर ट्रेनिंग देने की चुनौती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ट्रेनिंग में प्रैक्टिकल और टेक्नोलॉजी को शामिल नहीं किया गया तो ‘विकसितभारत’ का सपना क्लासरूम में नहीं उतर पाएगा। टीचर्स को सबसे ज्यादा निवेश क्रिटिकल थिंकिंग और टेक्नोलॉजी स्किल्स पर करना होगा।
सरकार पहले से ही पायलट प्रोजेक्ट चला रही है, जिसमें टीचर्स AI टूल्स से लेसन प्लानिंग कर रहे हैं। NEP 2020 के अनुरूप यह बदलाव भारत को ग्लोबल टेक वर्कफोर्स के लिए तैयार करेगा, लेकिन सफलता की कुंजी मजबूत टीचर ट्रेनिंग में है। शिक्षाविदों का मानना है कि अगर इस चुनौती को सही तरीके से संभाला गया तो भारत AI युग में दुनिया का लीडर बन सकता है।
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट ‘FromProspectivetoPreparedTeacher’ मुख्य रूप से टीचर एजुकेशन सिस्टम की कमियों पर फोकस करती है। यह जोर देती है कि आधुनिक शिक्षा (खासकर AI जैसी टेक्नोलॉजी) को लागू करने के लिए टीचर्स की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, निरंतर प्रोफेशनल डेवलपमेंट और टेक्नोलॉजी एकीकरण सबसे जरूरी है। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि बिना तैयार टीचर्स के कोई भी बड़ा शिक्षा सुधार असफल हो जाएगा।
Updated on:
10 Apr 2026 03:39 pm
Published on:
10 Apr 2026 03:36 pm
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