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युवाओं का बेहतर भविष्य तैयार कर रहे है जिंक कौशल केंद्र

बेरोजगारी एक ऐसा विषय है, जो मुख्यतः भारत के युवाओं के बीच सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है, खासकर देश के ग्रामीण इलाकों में।

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युवाओं के बेहतर भविष्य को तैयार कर रहे है जिंक कौशल केंद्र

युवाओं के बेहतर भविष्य को तैयार कर रहे है जिंक कौशल केंद्र

बेरोजगारी एक ऐसा विषय है, जो मुख्यतः भारत के युवाओं के बीच सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है, खासकर देश के ग्रामीण इलाकों में। इसके परिणाम के रूप में वे अपने विकास और गुणवत्तापूर्ण भविष्य के सृजन के अवसरों में कमी पाते हैं। शोध की मानें, तो बेरोजगारी के पीछे का प्रमुख कारण खराब गुणवत्ता की शिक्षा है। प्रासंगिक और उच्च-गुणवत्ता वाली शिक्षा की पहुंच में कमी देश की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है, जिसे हिंदुस्तान जिंक गहनता से समझता है और इस प्रकार इसने विभिन्न उपायों के माध्यम से स्थिति को सुधारने में मदद करने की मांग की है, जिसमें इसकी साइट्स के आसपास रहने वाले युवाओं को कुशल बनाना भी शामिल है।

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लैंगिक समानता को बढ़ावा देता है जिंक कौशल

जिंक कौशल केंद्र कार्यक्रम बेरोजगारी के मुद्दे को ही संबोधित नहीं करता है, बल्कि महिला एवं पुरुष सभी उम्मीदवारों को उद्योग-प्रासंगिक कौशल विकास और प्रासंगिक नौकरी के अवसरों तक पहुंच प्रदान करके लैंगिक समानता को बढ़ावा भी देता है। इसके लिए, हिंदुस्तान जिंक ने अंबुजा सीमेंट फाउंडेशन, टाटा स्ट्राइव और वेदांत फाउंडेशन जैसी कंपनियों के साथ साझेदारी की है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में एचजेडएल के कौशल विकास कार्यक्रमों को लागू करने में मदद करना है। इन संगठनों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में मूल्यांकन सर्वेक्षण की शुरुआत की गई, ताकि स्थानीय युवाओं के लिए उपलब्ध रोजगार के अवसरों के प्रकारों के साथ-साथ उनकी रुचि के विभिन्न क्षेत्रों की भी पहचान की जा सके। इन मूल्यांकनों को जिंक कौशल केंद्रों की नींव माना जाता है, जिनमें से पहले केंद्रों की स्थापना वर्ष 2019-20 में दरीबा और अगुचा में की गई थी और इस दौरान कुछ अवधि के लिए गहन पाठ्यक्रम की पेशकश की गई थी। आज, कंपनी के पांच ऐसे केंद्र संचालित हो रहे हैं, जिनमें कायद और देबारी के केंद्रों का प्रबंधन अंबुजा सीमेंट फाउंडेशन द्वारा किया जाता है, जबकि चंदेरिया और पंतनगर के केंद्रों का प्रबंधन टाटा स्ट्राइव द्वारा किया जाता है। वहीं, जावर स्थित जिंक कौशल केंद्र के कार्यक्रम के कार्यान्वयन का प्रभारी वेदांता फाउंडेशन है।

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भारत के युवाओं के लिए की साझेदारी

जिंक कौशल केंद्र पहल का कार्यान्वयन क्षेत्र के लिए समर्पित को-ऑर्डिनेटर्स की मदद से किया जाता है। इनमें से प्रत्येक केंद्र पर दो लोगों की नियुक्ति की गई है और वे समुदाय में कार्यक्रम के सामान्य प्रचार और कौशल विकास प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए पात्र लोगों की पहचान करता हैं। यह कार्यक्रम छात्रों को प्रोत्साहित करने और उन्हें कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जुड़ने में मदद करने के लिए प्रभावी, कुशल और सुदृढ़ तरीकों से अवगत कराने का प्रयास करता है, ताकि गतिशीलता सुनिश्चित की जा सके।

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प्रशिक्षण प्रक्रिया तीन चरणों में विभाजित

इस पूरी प्रशिक्षण प्रक्रिया को तीन चरणों में विभाजित किया जाता है, जिनमें पूर्व-प्रशिक्षण, प्रशिक्षण और प्रशिक्षण के बाद का चरण शामिल है। पूर्व-प्रशिक्षण प्रक्रिया कौशल आवश्यकताओं के मूल्यांकन और करियर परामर्श आदि को सम्मलित करती है, जबकि प्रशिक्षण प्रक्रिया में अन्य कारकों के अलावा व्यापार और सॉफ्ट स्किल डवलपमेंट सेशंस और ऑन-जॉब प्रशिक्षण शामिल हैं। इसके बाद प्रक्रिया का अंतिम चरण आता है, जो कि प्रशिक्षण के बाद का है, जिसमें जॉब फेयर्स, सलाह और समर्थन, रिफ्रेशर ट्रेनिंग, प्लेसमेंट्स आदि शामिल हैं। इस कार्यक्रम की शुरुआत के बाद से 5248 से अधिक युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं और 4350 से अधिक युवाओं को कंपनियों में नौकरी मिल गई है या फिर वे उद्यमी बन गए हैं।