
चारे के अभाव में पशुओं के हो रहे ये हाल,जानिए पूरी खबर
लाठी. क्षेत्र में इस वर्ष मानसून की एक बार भी अच्छी बारिश नहीं होने के कारण अकाल के हालात उत्पन्न हो गए है। ऐसे में किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें छाने लगी है। बारिश के अभाव में खेतों में बोई गई बाजरा, ग्वार, मूंग, मोठ की 80 प्रतिशत फसलें बर्बाद हो चुकी है। फसलें अंकुरित होने से पूर्व ही मुरझाने लगी है। क्षेत्र के कई गांवों में खरीफ की फसलें चौपट हो जाने से किसानों को लाखों रुपए का नुकसान हुआ है। बारिश के अभाव में खेतों में पूर्व में बोई गई फसलेंं रेत में दफन हो रही है।
चारे के अभाव में पशुओं के हालात बद्तर
क्षेत्र में इस वर्ष पड़े अकाल के कारण 600 रुपए में भी चारा उपलब्ध नहीं हो रहा है, जिससे पशुपालकों को अपने पशुओं को आवारा छोडऩे के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। चारे के अभाव में पशु जंगलों में भटक रहे है और काल के ग्रास हो रहे है। इसी प्रकार गांव में आवारा पशुओं की संख्या भी बढ़ गई है।
पशु शिविर व चारा डिपो की दरकार
क्षेत्र में इस वर्ष बारिश नहीं होने के कारण उपजे अकाल के हालातों के कारण पशु चारा नहीं मिल रहा है। दूसरी तरफ सरकार की ओर से भी अभी तक अनुदानित दरों पर चारा डिपो अथवा आवारा पशुओं के लिए पशु शिविर नहीं खोले गए है। पशुपालकों के लिए दुधारू पशुओं को भी बचा पाना मुश्किल हो रहा है तथा आवारा पशु जंगलों में चारे पानी के अभाव में दम तोड़ रहे है। गौरतलब है कि पूर्व में जब भी अकाल की स्थिति होती है, तो राज्य सरकार की ओर से आपदा प्रबंधन के अंतर्गत आवारा पशुओं के लिए ग्राम पंचायत अथवा स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से पशु शिविर व अनुदानित दरों पर चारा डिपो खोले जाते है, ताकि आम पशुपालक को सस्ते दर पर चारा उपलब्ध हो सके तथा आवारा पशुओं को पशु शिविरों में भर्ती कर बचाया जा सके। अकाल व बढ़ते आवारा पशुओं की संख्या को देखते हुए ग्राम पंचायत क्षेत्र में पशु शिविर व चारा डिपो की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
Published on:
14 Nov 2018 11:54 am
