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jaisalmer: सोनार दुर्ग की जर्जर दीवार, ठप यातायात और कार्यशैली ऐसी कि कछुआ भी शरमा जाए

जैसलमेर. सोनार दुर्ग की जर्जर प्राचीर को बचाने का काम चल रहा है, लेकिन संरक्षण की धीमी रफ्तार ने शिव मार्ग की चाल थाम दी है। दो जगह लोहे की चादरों से सड़क का बड़ा हिस्सा घिरने और बेतरतीब पार्किंग से मार्ग और संकरा हो गया है। पर्यटन सीजन में बढ़े वाहनों के दबाव के बीच यातायात व्यवस्था बेपटरी है और कुछ मिनट का दबाव लंबी कतार में बदल रहा है।
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जर्जर प्राचीर को बचाने का चल रहा काम

जैसलमेर. स्वर्णनगरी के ऐतिहासिक सोनार दुर्ग की जर्जर प्राचीर को बचाने का काम चल रहा है, लेकिन संरक्षण की धीमी रफ्तार ने दुर्ग के नीचे से गुजरने वाले शिव मार्ग की रफ्तार थाम दी है। मार्ग में दो जगहों पर प्राचीर के एक हिस्से को लोहे का पतरा लगाकर सड़क का बड़ा हिस्सा घेर दिया गया है। दूसरी तरफ सड़क किनारे बेतरतीब पार्किंग ने बची हुई जगह भी कम कर दी है। पर्यटन सीजन में बाहर से आने वाले वाहनों का दबाव बढ़ते ही स्थिति ऐसी बन रही है कि कुछ मिनट का यातायात दबाव लंबी कतार में बदल जाता है।

एक नजर में संकट

- 02 स्थानों पर प्राचीर के पास बैरिकेडिंग

-02 प्रमुख मार्ग पर यातायात का दबाव

-04 तरह के यातायात का एक साथ दबाव—स्थानीय, पर्यटक, टैक्सी और व्यावसायिक वाहन

-02 तरफ पार्किंग और निर्माण से सड़क की उपयोगी चौड़ाई प्रभावित

रास्ता रोका, लेकिन ट्रैफिक व्यवस्था कहां?

निर्माण स्थल को सुरक्षित रखने के लिए खतरनाक हिस्से को रोकना जरूरी है, लेकिन संकरे हिस्से में दोनों दिशाओं से वाहन आते हैं। चार पहिया वाहन आमने-सामने आते ही यातायात की गति थमने लगती है।

दुपहिया वाहन चालक किनारे से निकलने का प्रयास करते हैं तो पैदल राहगीरों के लिए जगह और कम हो जाती है। व्यस्त समय में यातायात कर्मियों की नियमित तैनाती नहीं होने से चालक अपनी सुविधा के अनुसार रास्ता निकालते हैं।

नतीजा—सड़क पर अनुशासन के बजाय हर वाहन के बीच रास्ता बनाने की होड़।

पर्यटन सीजन में ‘वन-वे’ जैसी स्थिति

शिव मार्ग पर निर्माण के कारण सड़क का प्रभावी उपयोग पहले ही सीमित है। पर्यटन सीजन में टैक्सी, निजी कार, ऑटो और स्थानीय दोपहिया वाहनों की संख्या बढ़ जाती है। एक तरफ दुर्ग और पर्यटन क्षेत्र की आवाजाही, दूसरी तरफ बाजार और बैंकिंग सहित अन्य व्यावसायिक गतिविधियां। ऐसे में सड़क की मौजूदा क्षमता पर्याप्त नहीं रह जाती। यदि पीक ऑवर में एकतरफा यातायात, नो-पार्किंग जोन और यातायात कर्मियों की तैनाती जैसी व्यवस्थाएं लागू हों तो दबाव कम किया जा सकता है। फिलहाल ऐसी समन्वित व्यवस्था जमीन पर नजर नहीं आती।

एक्सपर्ट व्यू : संरक्षण जरूरी, लेकिन यातायात प्रबंधन भी उसी योजना का हिस्सा

व्यस्त पर्यटन मार्ग पर निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा बैरिकेडिंग आवश्यक है, लेकिन इसके साथ यातायात प्रबंधन भी जरूरी है। पीक ऑवर में यातायात कर्मियों की तैनाती, नो-पार्किंग का सख्ती से पालन, बड़े वाहनों के प्रवेश का समय निर्धारण और आवश्यकता के अनुसार एकतरफा यातायात व्यवस्था लागू की जा सकती है। इससे निर्माण स्थल की सुरक्षा बनी रहेगी और आमजन को भी अनावश्यक जाम से राहत मिल सकती है।

ग्राउंड रिपोर्ट :समस्या सड़क से ज्यादा सिस्टम की

1. निर्माण की गति: काम चल रहा है, लेकिन आमजन को इसकी स्पष्ट समयसीमा नजर नहीं आती।

2. ट्रैफिक प्रबंधन: बैरिकेडिंग के बाद यातायात को नियंत्रित करने की स्थायी व्यवस्था दिखाई नहीं देती।

3. पार्किंग: सड़क किनारे खड़े वाहन उपलब्ध जगह को और सीमित कर रहे हैं।

4. पर्यटन दबाव: सीजन में बढ़ने वाले पर्यटक वाहनों के लिए अलग यातायात योजना दिखाई नहीं देती।

5. जाम का विस्तार: निर्माण स्थल का दबाव आगे बढ़कर गोपा चौक क्षेत्र तक पहुंच रहा है।

जिम्मेदारों के लिए पांच सवाल

01 संरक्षण कार्य पूरा करने की निर्धारित समयसीमा क्या है?

02 अब तक कितना काम पूरा हुआ और कितना बाकी है?

03 बैरिकेडिंग या मेटल शीट लगाने के बाद वैकल्पिक यातायात योजना क्यों नहीं लागू हुई?

04 व्यस्त समय में नियमित यातायात कर्मियों की तैनाती क्यों नहीं?

05 पर्यटन सीजन को देखते हुए शिव मार्ग का विशेष ट्रैफिक प्लान कहां है?

एक्सपर्ट व्यू : संरक्षण जरूरी, लेकिन यातायात प्रबंधन भी उसी योजना का हिस्सा

व्यस्त पर्यटन मार्ग पर निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा बैरिकेडिंग या मेटल शीट लगाना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ यातायात प्रबंधन भी जरूरी है। पीक ऑवर में यातायात कर्मियों की तैनाती, नो-पार्किंग का सख्ती से पालन, बड़े वाहनों के प्रवेश का समय निर्धारण और आवश्यकता के अनुसार एकतरफा यातायात व्यवस्था लागू की जा सकती है। इससे निर्माण स्थल की सुरक्षा बनी रहेगी और आमजन को भी अनावश्यक जाम से राहत मिल सकती है।

-चंद्रशेखर थानवी, सामाजिक कार्यकर्ता