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Jaisalmer Border News- रेगिस्तान में बरस रही गोलियां, टेंक दाग रहे गोले, सैना के जवान कर दुश्मन के ठिकाने तबाह

रेगिस्तान में सेना कर रही ‘हमेशा विजयी’ युद्धाभ्यास - सेना की दक्षिणी कमान 22 तक करेगी अभ्यास
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जैसलमेर. दुश्मन को नेस्तानाबूद करने का जज्बा इन दिनों राजस्थान की पश्चिमी सीमा क्षेत्रों में देखा जा सकता है। दुश्मन को हर परिस्थिति में मात देने के लिए सरहदी जैसलमेर जिले के रेगिस्तानी इलाकों में इन दिनों काल्पनिक युद्ध को ऐसे लड़ा जा रहा है, जैसे हकीकत का युद्ध हो रहा है। जी हां भारतीय सेना की दक्षिण कमान की ओर से इन दिनो रेगिस्तानी क्षेत्र में युद्धाभ्यास कर रही है। इस युद्धाभ्यास को हमेशा विजय का नाम दिया गया है। अभ्यास के दौरान दुश्मन को हर परिस्थिति में नेस्तानाबूद करने का जज्बा रेगिस्तानी सीमाओं पर देखा जा सकता है। इस दौरान बंदूकों की गोलियां व गोले बरसाते हुए दौड़ते टैंक व सैनिकों की टुकडिय़ां युद्धाभ्यास कर रही है।

भारतीय सेना की दक्षिण कमान इन दिनों रेगिस्तानी इलाकों में ‘हमेशा विजयी’ नामक महत्वपूर्ण युद्धाभ्यास कर रही है। यह अभ्यास गत 16 दिसम्बर से प्रारंभ हुआ और आगामी 22 तारीख तक चलेगा। सेना की ओर से इस युद्धाभ्यास का उद्देश्य एकीकृत रूप से दुश्मन के इलाकों की गहराई में जाकर सशस्त्र बलों की क्षमता का मूल्यांकन करना बताया गया है।

IMAGE CREDIT: patrika

वायुसेना के साथ तालमेल पर जोर
रक्षा विभाग के प्रवक्ता ले. कर्नल मनीष ओझा ने बताया कि सेना की यूनिट एवं फार्मेशन अपने रण कौशल और रणनीति को उच्च कोटि का बनाने के लिए पिछले दो महीनों से प्रशिक्षण कर रहे हैं। प्रारंभिक प्रशिक्षण के बाद, एकीकृत रूप से टैंक बख्तरबंद गाडिय़ां और वायुसेना के साथ पूरा तालमेल बिठाते हुए सैनिक इस युद्धाभ्यास को आगे बढ़ा रहे हैं। जानकारी के अनुसार इस युद्धाभ्यास में सर्वेलन्स नेटवर्क की मदद से सटीक हमले और संयुक्त संचालन पर आधारित रणनीतिक और सामरिक उपकरणों का भी परीक्षण किया जाएगा। पारंपरिक युद्ध के अलावा, सैनिकों को रासायनिक और परमाणु आकस्मिकताओं के लिए भी अभ्यास कराया जाएगा। इस दौरान सेना और वायुसेना के बीच उच्च स्तर के तालमेल का भी प्रदर्शन किया जाएगा। युद्धाभ्यास की समीक्षा दोनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी करेंगे।
...इसलिए करते हैं अभ्यास
प्रवक्ता ओझा ने बताया कि सेना की दक्षिणी कमान नियमित अंतराल पर इस तरह के अभ्यास करती है ताकि आधुनिक हथियारों के साथ ही उच्च परिचालन योजनाओं की वैधता सुनिश्चित की जा सके।