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मेहमानों की खातिरदारी में स्थानीय अफसरों के सर्दी में भी छूट रहे पसीने,आखिर ऐसा क्यों?जानिए पूरी खबर

-सर्किट हाउस में बीते दिनों से ’नो-रूम’ के हालात-होटलों और रिसोर्ट में ठहरने का ठौर जुटाना बना चुनौती
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मेहमानों की खातिरदारी में स्थानीय अफसरों के सर्दी में भी छूट रहे पसीने,आखिर ऐसा क्यों?जानिए पूरी खबर

जैसलमेर. नए साल 2019 का स्वागत करने के लिए देश भर के सैलानी स्वर्णनगरी में जुट रहे हैं, जिनके लिए होटलों और रिसोर्ट संचालकों की तरफ से हरचंद उपाय किए गए हैं लेकिन सरकारी अधिकारियों के लिए जैसलमेर के प्रति वीआईपी और वीवीआईपी का बढ़ा आकर्षण उलझन का सबब बन गया है। कई प्रशासनिक और पुलिस सहित विभिन्न विभागों के उच्च अधिकारी यहां परिवार के साथ पधार रहे हैं। उनके ठहरने के लिए होटलों तथा सम के रिसोर्ट में व्यवस्था जुटाना यहां पदस्थापित अधिकारियों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। प्रशासन के पास सरकारी विश्राम गृह के तौर पर सर्किट हाउस है, जहां कमरे कम हैं और वहां रुकने के तलबगार ज्यादा हैं। ऐसे में संकट और विकट हो गया है। गत 22 तारीख से सर्किट हाउस में ’नो-रूम’ के हालात हैं। यहां बड़ी संख्या में लोकायुक्त, निर्वाचित जनप्रतिनिधि, न्यायाधीश, आइएएस और आइपीएस अधिकारी अथवा उनकी ओर से भेजे गए मेहमान आ रहे हैं।
सभी कमरे एडवांस बुक
जैसलमेर के रामगढ़ मार्ग पर अवस्थित सर्किट हाउस में कुल 22 कमरों में मेहमानों के ठहरने की व्यवस्था है। इनमें सुपर डिलक्स, डिलक्स और सामान्य कमरे शामिल हैं। सरकारी इमारत में ठहरने की इच्छा रखने वालों की संख्या इतनी ज्यादा है कि आगामी नए साल के शुरुआती दिनों तक सारे कमरे अग्रिम तौर पर बुक हो चुके हैं। दरअसल, मेरिट के आधार पर सरकारी अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के लिए सर्किट हाउस में ठहरने से लेकर खाने-पीने की दरें खासी कम है। ऐसे में उनकी पहली पसंद यही जगह रहती है। हालत यह है कि, सर्किट हाउस में कमरों का आबंटन प्रशासन की देखरेख में किया गया है।
संपर्को से ले रहे काम
अधिकारियों को सरकारी विश्राम गृहों में ठहरने की जगह नहीं होने के चलते जैसलमेर की होटलों तथा सम के रिसोट्र्स में उच्चाधिकारियों को ठहराने के लिए व्यवस्था करवानी पड़ रही है। एक ओर पर्यटन के लिहाज से बम्पर सीजन चल रहा है, ऐसे में स्थानीय अधिकारियों के संबंधित लोगों से व्यक्तिगत सम्पर्क काम आ रहे हैं। बड़ी होटलों तथा नामचीन रिसोट्र्स के प्रबंधकों को भी अधिकारियों का अनुरोध स्वीकार करने में खासी दिक्कतें आ रही हैं। दरअसल, उनके पास पहले से अच्छी खासी बुकिंग है। हर साल के आखिर में अधिकारियों के लिए व्यवस्था करने के लिए उन्हें कुछ कमरे अपने हाथ में रखने पड़े हैं। ऐसे लोगों को घाटा सहन कर बाहर से आने वाले वीआइपी को ठहराने की मजबूरी है।

खतिरदारी में कमी नहीं
सर्किट हाउस में ठहरने वाले मेहमानों की सुख सुविधा का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। यहां के सभी कमरे अग्रिम रूप से बुक चल रहे हैं। साफ-सफाई से लेकर अन्य इंतजाम करने में पूरा स्टाफ जुटा हुआ है।
-देवेन्द्रसिंह राठौड़, प्रबंधक, सर्किट हाउस, जैसलमेर