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खुलेआम सड़कों पर हो रहा कुछ ऐसा,अनहोनी की आशंका,जानिए पूरी खबर

जिम्मेदारों की लापरवाही... सडक़ों पर दौड़ रहे काले शीश लगे वाहन-मुख्य मार्गों पर भी असुरक्षित महसूस करती है महिलाएं -प्रतिबंध के बावजूद वाहन चालकों में नहीं दिख रहा भय
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jaisalmer

खुलेआम सड़कों पर हो रहा कुछ ऐसा,अनहोनी की आशंका,जानिए पूरी खबर

जैसलमेर. शहर के आम रास्ते हो या मुख्य मार्ग या फिर पर्यटन स्थल। नियमों को ताक पर रखकर काले शीशे लगे वाहन इन दिनों स्वर्णनगरी में दौड़ते देखे जा सकते हैं। प्रतिबंध के बावजूद इन काले शीशे लगे वाहनों को न कोई रोकने वाला है और न ही कोई टोकने वाला । इन शीशों के कारण यह नहीं दिखाई देता कि वाहन के भीतर कौन बैठा है और क्या हो रहा है? यह बात किसी से छिपी नहीं है कि हर हादसे की वजह कोई न कोई लापरवाही ही बनती है। काले शीशे लगे वाहनो को देखकर उदासीनता बरतना सरहदी जिले के बाश्ंिादों के लिए खतरा बन सकता है। इन दिनों शहर का हनुमान चौराहा हो या गोपा चौक, गड़ीसर रोड हो या जोधपुर मार्ग..। जहां भी नजर दौड़ाने पर काले शीशे लगी कारों को सडक़ों पर दौड़ते देखा जा सकता है। न इन्हें नियमों की परवाह व कायदों को लेकर चिंता। हकीकत यह है कि नियमों को ताक पर रखकर स्वर्णनगरी में अभी भी कारों व अन्य वाहनों में काले शीशों वाले कांच का उपयोग धड़ल्ले से हो रहा है। चाहे ये कारें स्थानीय लोगों की हो या फिर सैलानियों की, इनकों रोकने वाला कोई नहीं है, जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश है कि वाहनों में काले शीशों का उपयोग नहीं किया जा सकता। हकीकत यह भी है कि काले शीशे लगे वाहनों को उतारने को लेकर अब तक केवल हवाई चेतावनी ही दी जा रही है। इन शीशों को हटाने के लिए अभी तक कोई सख्त मुहिम नहीं चलाई गई है और न ही कोई चलाए जाने के आसार फिलहाल देखने को मिल रहे हैं। जैसलमेर के पर्यटन स्थलों के समीप पार्किंग स्टैण्ड पर भी काले शीशे लगे वाहनों को देखा जा सकता है।
हकीकत यह भी
-स्वर्णनगरी की साख इन दिनों मनचलों की हरकतों के कारण खराब होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
-महानगरों की तुलना में कम क्षेत्रफल व आबादी के बावजूद विद्यालय, महाविद्यालय या कोचिंग जाने वाली बालिकाएं भयभीत नजर आती है।
-मनचलों व आवारा किस्म के लोगों का मुख्य मार्गों पर जमावड़ा देखा जा सकता है।
-इन लोगों की हरकतों के कारण गुजरने वाले लोगों को शर्मसार होना पड़ता है, ऐसे में छात्राओं की परेशानी को समझा जा सकता है।
-छात्राओं को देखकर फब्तियां कसने, पीछा करने या परेशान करने की घटनाएं आए दिन होती रहती है।
-मुख्य मार्गा व पर्यटन स्थलों सहित पार्किंग एरिया में आवारा किस्म के लोगों की टोलियां को देखा जा सकता है।
- सख्ती के अभाव में ऐसी प्रवृत्तियां रुकने का नाम ही नहीं ले रही।