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jaisalmer: भाजपा के डांगरा और कांग्रेस के पुरोहित में होगा सभापति पद का मुकाबला

जैसलमेर नगरपरिषद में सभापति पद के चुनाव की तस्वीर अब लगभग साफ हो गई है। बहुमत हासिल कर चुकी भाजपा ने उद्योगपति विजय डांगरा को प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस ने वार्ड 33 में पराजित निर्मल पुरोहित को मैदान में उतारा है।
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विजय डांगरा और निर्मल पुरोहित

जैसलमेर नगरपरिषद का चुनाव अब अंतिम चरण में है। पार्षदों के निर्वाचन के बाद सबकी निगाहें सभापति पद पर है। 45 सदस्यों वाले बोर्ड में 25 सीटें जीत कर बहुमत हासिल कर चुकी भाजपा ने इस पद के उम्मीदवार के तौर पर उद्योगपति विजय डांगरा पर दांव लगाया है। राजनीति में नए नवेले डांगरा के सामने कांग्रेस ने वार्ड संख्या 33 में पराजित हो चुके निर्मल पुरोहित पर भरोसा जताया है। पुरोहित ने हाइब्रिड पद्धति के तहत सभापति पद के लिए गत बुधवार को नामांकन दाखिल किया था। कांग्रेस ने उनके नाम पर मोहर लगाई। गौरतलब है कि कांग्रेस की तरफ से पूर्व सभापति अशोक सिंह तंवर और भाजपा की ओर से अरुण पुरोहित ने भी नामांकन किया था। बताया जाता है कि तंवर ने अपना नाम वापस ले लिया है और संभवत: शुक्रवार को अरुण पुरोहित भी अपना नाम वापस ले लेंगे। इस तरह से सभापति पद के लिए आगामी 21 सितम्बर को होने वाले चुनाव में विजय डांगरा व निर्मल पुरोहित के बीच में सीधा संघर्ष होगा। गुरुवार को नामांकन पत्रों की संवीक्षा के दौरान रिटर्निंग अधिकारी की ओर से पार्टियों के सिम्बल का खुलासा किया गया। जिसके बाद से राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

भाजपा को बचाने तो कांग्रेस को तोडऩे हैं पार्षद

जैसलमेर नगरपरिषद के लिए गत 9 सितम्बर को मतदान हुआ था और 14 तारीख को वार्डों में हुए चुनाव के नतीजे सामने आए। इसके अनुसार राज्य में सत्ताधारी भाजपा ने 25 और विपक्षी कांग्रेस ने 16 सीटें जीती। जबकि 4 निर्दलीय निर्वाचित हुए। सभापति बनने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 23 मतों की दरकार है। ऐसे में भाजपा के सामने अब अपने जीते हुए पार्षदों को एकजुट रखने की चुनौती है वहीं कांग्रेस को अपने 16 पार्षदों के अलावा 7 और पार्षदों का समर्थन जुटाने की जरूरत है। 4 निर्दलीय पार्षदों की भूमिका भी अहम रहने वाली है। साल 2019 के सभापति चुनाव की याद सबको ताजा है। उस समय कांग्रेस के पास 21, भाजपा के पास 20 निर्वाचित सदस्य थे और 4 निर्दलीय निर्वाचित हुए थे। त्रिकोणीय संघर्ष में कांग्रेस से बागी होकर निर्दलीय चुनाव लडऩे वाले हरिवल्लभ कल्ला ने सबसे ज्यादा 19 वोट हासिल किए थे। भाजपा प्रत्याशी को 13 व कांग्रेस को 12 मत मिले। 1 वोट खारिज हो गया था।

पार्षदों की बाड़ाबंदी जारी

दूसरी ओर इस सारे खेल के असली निर्णायक लगभग सभी पार्षदों की बाड़ाबंदी जारी है। चुनाव वाले दिन से ज्यादातर उम्मीदवारों को दोनों पार्टियों ने अपने कब्जे में ले लिया था और जिले से बाहर ले जाकर उन्हें रखा गया है। नतीजों के बाद पराजित प्रत्याशियों को घर भेजा गया और विजयी पार्षद निरंतर अज्ञातवास में चल रहे हैं।