8 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

Education News: 25 साल की सेवा के बाद भी न नियमित और न 17 हजार से अधिक मानदेय

वर्ष 1998 से सामन्य मानदेय पर प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाने वाले पैरा टीचर्स, शिक्षा सहयोगी और शिक्षाकर्मियों को नियमित करने का इंतजार अब तक इंतजार ही बना हुआ है। वर्ष 2022 में बिल पास हुआ तो उम्मीद जगी कि वंचित वर्ग को हक मिल सकेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। दूर-दराज के क्षेत्रों में शिक्षा पहुंचाने वाले शिक्षाकर्मी और पैरा टीचर्स ‘स्क्रेनिंग कमेटी’ में ही उलझे रहे।

2 min read
Google source verification
Education News: 25 साल की सेवा के बाद भी न नियमित और न 17 हजार से अधिक मानदेय

Education News: 25 साल की सेवा के बाद भी न नियमित और न 17 हजार से अधिक मानदेय

वर्ष 1998 से सामन्य मानदेय पर प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाने वाले पैरा टीचर्स, शिक्षा सहयोगी और शिक्षाकर्मियों को नियमित करने का इंतजार अब तक इंतजार ही बना हुआ है। वर्ष 2022 में बिल पास हुआ तो उम्मीद जगी कि वंचित वर्ग को हक मिल सकेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। दूर-दराज के क्षेत्रों में शिक्षा पहुंचाने वाले शिक्षाकर्मी और पैरा टीचर्स ‘स्क्रेनिंग कमेटी’ में ही उलझे रहे। गौरतलब है कि वर्ष 2022 के अन्तर्गत कनिष्ठ शिक्षक और शिक्षा सहायक नाम दिए जाने के बाद उक्त पदों के कार्मिकों को निम्नानुसार सेवा अवधि पूर्ण करने पर उच्चतर पारिश्रमिक एवं पदनाम दिए जाने की सहमति अप्रेल-2023 में प्रदान की गई थी। इसके तहत कनिष्ठ शिक्षक और शिक्षा सहायक जिन्हें नौ वर्ष का अनुभव प्राप्त है, उनका मासिक पारिश्रमिक 29,600 रुपए और कनिष्ठ शिक्षक और पंचायत शिक्षक, जिनके निर्धारित 18 वर्ष की संविदा अवधि पूर्ण करने पर मासिक संशोधित पारिश्रमिक51600 रुपए करने का आदेश पारित किया, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। आदेश के बाद भी कई शिक्षाकमी 25 साल से अधिक विभाग की सेवा कर खाली हाथ ही सेवानिवृत हो गए। निदेशालय ने प्रथम आदेश पारित किया है कि 9 वर्ष और 18 वर्ष में प्राप्त मानदेय में दो वार्षिक वृद्धि जोड़ कर निर्धारित करने की सहमति दी, जिस पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। न उन्हें आजीएचएस की सुविधा है और न आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ ही देय है।

हकीकत यह भीगत 21 अक्टूबर 2022 को पाठशाला सहायक पद पर समायोजित करके न्यूनतम मानदेय 10400 रखा गया। इसके बाद 14 अप्रेल 2023 को आदेश कर अनुपालना में योग्यताधारी कार्मिकों को संशोधित पद नाम कनिष्ठ शिक्षक और न्यूनतम मानदेय 16900 प्रतिमाह रखा गया। यह मानदेय संरक्षित की श्रेणी में नही आता है।

बदले तो सिर्फ नाम, न कि मानदेयशिक्षा विभाग में लंबे समयावधि के भीत पंचायत सहायक शिक्षा कर्मी और पैराटीचर के केवल नाम बदले गए हैं। हकीकत यह है कि 29000 और 51,000 रुपए वाले मानदेय के निकट नहीं आने दिया गया। इस मानदेय से वंचित रखने के लिए मानदेय को संरक्षित किया गया और संविदा कानून 2022 के पूर्व की सेवा को शून्य मानी गई है। उनकी सेवा गणना 9, 18 की कुल सेवा में सम्मिलित नहीं किया।

क्या स्क्रेनिंग कमेटीसंविदा कर्मियों को नियमित करने के लिए जिला स्तर पर प्री स्क्रीनिंग जिला स्तरीय समिति और प्रदेश स्तर पर प्री स्क्रीनिंग प्रदेश स्तरीय समिति का गठन किया, जिला स्तर पर काम पूरा हो गया। प्रदेश स्तर पर यह कार्य आज तक आज तक नही हुआ। सचिवालय में फाइल अटकी पड़ी हैं।

प्रदेश में यह है स्थिति

-1764 वरिष्ठ शिक्षाकर्मी-2048 सामान्य शिक्षाकर्मी

-3886 पैरा टीचर्स

जैसलमेर में स्थिति-85 पैराटीचर

-40 शिक्षाकर्मी

उचित नहीं हुआ है...
संविदा नियम के नाम पर उचित नहीं हुआ है। सरकार ने भी करीब 6000 फाइल पर हस्ताक्षर नहीं किए। मानदेय के नाम पर छलावा ही हुआ है। आंदोलन चलाकर सरकार को जगाएंगे।

-प्रकाश विश्नोई, प्रदेश उपाध्यक्ष राज पंचायतीराज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ