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जिला अस्पताल में एम्बुलेंस की है व्यवस्था, फिर भी इस वजह से मरीजों के नहीं आ रही काम, जानिए पूरी खबर

- जिला अस्पताल में गंभीर रोगियों को नहीं मिल रही एम्बुलेंस की बुनियादी सुविधा- ‘108’ एम्बुलेंस को बुलाना भी मुश्किल
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जिला अस्पताल में एम्बुलेंस की है व्यवस्था, फिर भी इस वजह से मरीजों के नहीं आ रही काम, जानिए पूरी खबर

जैसलमेर. पिछले दिनों जिले के एकमात्र सरकारी अस्पताल जवाहर चिकित्सालय के संबंध में दो दुर्भाग्यपूर्ण हालात सामने आए।पहले में एक युवक को गंभीर हालत में अमरसागर स्थित उसके घर से महज 5 किलोमीटर दूरी पर स्थित जवाहर चिकित्सालय लाना था, लेकिन परिजन ‘108’एम्बुलेंस को कॉल करके हैरान हो गए। किसी ने कॉल नहीं ली।उसके चंद दिन बाद एक अत्यंत गंभीर हृदयरोगी को जवाहर चिकित्सालय से पास ही स्थित निजी अस्पताल ले जाया जाना था।लेकिन ‘108’ एम्बुलेंस वालों ने इसमें असमर्थता जता दी और अस्पताल में खड़ी उसकी अपनी एम्बुलेंस काम में नहीं आ सकी।ये दो मामले अपने आप में जिले के चिकित्सा तंत्र में एम्बुलेंस सेवा की कमी को सामने लाने के लिए पर्याप्त है।गंभीर रोगियों व उनके परिजनों को इस समस्या से आए दिन जूझना पड़ता है और हजारों रुपए खर्च कर निजी एम्बुलेंस किराये पर ले जाना उनके लिए मजबूरी बना हुआ है।

सरकारी दरियादिली का लाभ नहीं
जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में कोई रोगी अगर गंभीर अवस्था में है और चिकित्सक उसे रैफर करते हैं तो नियमानुसार रोगी को अन्यत्र उपचार के लिए ले जाने को नि:षुल्क एम्बुलेंस मुहैया करवाई जानी होती है। जवाहर चिकित्सालय प्रषासन के पास एक अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एम्बुलेंस इस काम के लिए सरकार ने भेज रखी है। लेकिन उसे चलाने वाला कोई चालक नहीं है।जानकारी के मुताबिक अस्पताल के एक चालक ने आंखों का ऑपरेषन करवा रखा है तो दूसरा उम्रदराज है।जिसे इतनी बड़ी गाड़ी चलाने का अनुभव ही नहीं है।ऐसे में लाखों रुपए की सुविधाओं से युक्त एम्बुलेंस जड़वत खड़ी ही रहती है।इसके अलावा सरकार ने ‘108’ और ‘104’नामक एम्बुलेंस सेवा की व्यवस्था कर रखी है। उन्हें भी गंभीर रोगियों को खासकर गर्भवती अथवा प्रसूता महिला तथा नवजात षिषुओं को रैफर किए जाने की स्थिति में नि:षुल्क ले जाना होता है।लेकिन इनके संचालक आसानी से तैयार नहीं होते और लोगों को हजारों रुपए खर्च कर निजी एम्बुलेंस का सहारा लेना होता है।

हजारों का खर्च करने की विवशता
सरकारी स्तर पर एम्बुलेंस की माकूल व्यवस्था नहीं होने की वजह से जिला मुख्यालय पर कम से कम एक दर्जन निजी वाहनों में स्थापित की गई एम्बुलेंस काम में ली जाती है।जिनका किराया 10-11 रुपए प्रति किलोमीटर होता है।ऐसे में जोधपुर मरीज को ले जाने का खर्च 6000-6500 तथा डीसा-अहमदाबाद के लिए यह खर्च 12 हजार रुपए तक होता है।नियमानुसार मरीज को निजी एम्बुलेंस ले जाने की निर्धारित राषि का पुनर्भरण सरकार करती है, लेकिन इसकी औपचारिकताएं इतनी ज्यादा और चिकित्सा विभाग का रवैया इतना उदासीन होता है कि बहुत कम लोग ही सरकारी सहायता हासिल कर पाते हैं।
इधर 29 गाडिय़ों का बेड़ा
जिले में आपातकालीन सेवाओं के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महकमे के पास कुल 29 गाडिय़ां हैं। इनमें एक बेस एम्बुलेंस के अलावा 13 वाहन ‘108’ तथा 14 वाहन ‘104’सेवा के लिए निर्धारित हैं। ये वाहन जिले के अलग-अलग चिकित्सा केंद्रों के अंतर्गत अपनी सेवाएं देती हैं।जहां कहीं भी सडक़ हादसा होने पर नजदीकी एम्बुलेंस को तुरंत मौके पर पहुंचना होता है।जिले के ग्रामीण इलाकों से कई बार आपातकालीन परिस्थितियों में एम्बुलेंस के समय पर नहीं पहुंचने की षिकायतें भी मिलती हैं।

फैक्ट फाइल -
-38 हजार किलोमीटर से ज्यादा जिले का क्ष् ोत्रफल
-150 षैय्याओं वाला है जवाहर चिकित्सालय
-01 ही सरकारी अस्पताल है जैसलमेर में

नए ड्राईवर लिए जाएंगे
जवाहर चिकित्सालय में एक एएलएस एम्बुलेंस और एक पुरानी जीप है। एम्बुलेंस चलाने वाले ड्राईवर की कमी है। एनजीओ के माध्यम से दो नए ड्राईवर जल्द लिए जाएंगे। उसके बाद ही एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध करवाई जा सकेगी।
-डॉ. उषा दुग्गड़, पीएमओ, जवाहर चिकित्सालय, जैसलमेर