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जैसलमेर में किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें, यह है वजह

-लक्ष्य से आधी भी नहीं हुई खरीफ फसलों की बुआई-मानसून की बेरुखी व आंधी चलने से किसान चिन्तित
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Farmer worried by thunderstorm in Jaisalmer

जैसलमेर में किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें, यह है वजह

जैसलमेर /पोकरण. श्रावण माह के प्रथम सप्ताह व जुलाई माह के अंतिम दिनों तक क्षेत्र में अच्छी बारिश नहीं होने और मौसम की बेरुखी व तेज हवाओं के साथ आंधी चलने से किसानों की नींद उडऩे लगी है। उनके चेहरों पर चिंता की लकीरें देखी जा सकती है। इस वर्ष अब तक मानसून की बेरुखी के चलते क्षेत्र में कहीं एक बार भी बारिश नहीं होने से बुआई हो सकी है, तो कहीं आधी-अधूरी खेती करके किसान निराश है। गत कुछ दिनों से चल रही तेज हवा के साथ आंधी कृषकों की उम्मीदों को तार-तार कर रही है। जुलाई माह के अंतिम सप्ताह में भी आंधी चलने से एक माह की अवधि में बोई गई बाजरा, ग्वार, मूंगफली व अन्य दलहनी फसलों की जड़े निकलनी शुरू हो गई है। जबकि मानसून की बेरुखी से कृषि विभाग का खरीफ बुआई लक्ष्य अपने निर्धारित लक्ष्य से कौसों दूर है। हालांकि किसान बादल बरसने की आस में अभी भी आसमान की ओर एकटक नजर गड़ाए बैठे है।

आधी भी नहीं बुवाई
मारवाड़ में बाजरा उत्पादन में अग्रणी रहने वाला जैसलमेर जिला व पोकरण क्षेत्र इस बार मानसून के दगा देने से हर फसल के मामले में बुआई के लक्ष्य से पिछड़ गया है। जिले में खरीफ फसलों की बुवाई लगभग पांंच से छह लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में की जाती है, लेकिन इस बार विभागीय लक्ष्य की तुलना में अभी तक करीब एक लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में ही बुआई हो पाई है। तीन लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में बोए जाने वाले ग्वार की बुआई मात्र 30 से 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में तथा बाजरे का लक्ष्य 20 से 25 हजार हेक्टेयर पर अटक गया है। इसी प्रकार दलहनी फसलों में दो हजार हेक्टेयर में मूंग व मोठ की बुआई हो पाई है।

अब चारे की बची उम्मीद
जुलाई माह बीतने को है, लेकिन किसान सुकाल की आस में बुआई के लिए बारिश का इंतजार कर रहे है। अब यदि अच्छी बारिश होती भी है तो श्रावण माह के प्रथम पखवाड़े तक बुआई के लिए अनुकूल सीजन रहेगा। इसके बाद बारिश होने पर मात्र चारे की ही उम्मीद की जा सकती है। इस वर्ष बारिश का मौसम शुरू होने के बाद एक माह पूर्व 28 जून को कस्बे के आसपास व भणियाणा क्षेत्र में एक से डेढ इंच बारिश हुई थी। जिससे किसानों ने अपने खेतों में बुआई का कार्य शुरू किया, लेकिन एक पखवाड़े बाद भी तेज ठण्डी हवाएं व आंधियां चलने लगी। गत दिनों दो-तीन बार हल्की बूंदाबांदी हुई, लेकिन अच्छी बारिश नहीं होने से अब तक पर्याप्त मात्रा में बुआई नहीं हो सकी है तथा तालाबों व खड़ीनों में भी पानी की आवक नहीं होने से किसानों को अकाल की चिंता सताने लगी है। सांकड़ा, फलसूण्ड, रामदेवरा, नाचना क्षेत्र के कई गांवों में अच्छी बारिश नहीं होने से बुआई भी नहीं हो सकी है।
नोख. क्षेत्र में मानसून की बारिश के दौरान खेती करने वाले किसानों की उम्मीदों पर गत तीन-चार दिनों से चल रही आंधियों ने पानी फेर दिया है। गौरतलब है कि गत दिनों बारिश के मौसम को देखते तथा एक बारिश के बाद किसानों ने खेतों में बुआई का कार्य शुरू कर दिया था। किसानों की ओर से कर्ज लेकर खेती शुरू कर दी गई थी तथा कई किसानों ने बाजरे व ग्वार की फसल की बुआई भी कर दी थी, लेकिन गत कुछ दिनों से चल रही आंधियां अब किसानों की नींदे उड़ा रही है। आंधी के कारण बीज अंकुरित नहीं हो पा रहा है। जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिरने की आशंका बढ गई है।