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आंदोलन में कूदे तो अंग्रेजी सरकार ने जेल में डाला, आजाद भारत में दी निर्धनों और वंचितों को नि:शुल्क चिकित्सा सेवा

दे दी हमें आजादी: स्वतंत्रता सेनानी डॉ. कन्हैयालाल अचलवंशी का जन्म 8 सितम्बर 1915 को वर्तमान पाकिस्तान के कंबर जिले में हुआ था। उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद सेवा और संघर्ष की राह चुनी। आजादी के बाद वे जैसलमेर आए।

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डॉ. कन्हैयालाल अचलवंशी, जैसलमेर (फोटो: पत्रिका)

Freedom Fighter Dr. Kanhaiyalal Achalvanshi: महात्मा गांधी से प्रेरित होकर वे स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय हुए। नमक आंदोलन में भाग लेने पर उन्हें जेल जाना पड़ा, लेकिन जेल से बाहर आकर भी उनका जज्बा कायम रहा।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से प्रेरित होकर डॉ. कन्हैयालाल अचलवंशी नमक आंदोलन में कूद पड़े। अंग्रेजी सरकार ने उन्हें जेल में डाल दिया। स्वतंत्रता सेनानी डॉ. कन्हैयालाल अचलवंशी का जीवन केवल आजादी की लड़ाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आजाद भारत में उन्होंने अपना पूरा जीवन निर्धनों और वंचितों की नि:शुल्क चिकित्सा सेवा को समर्पित कर दिया।

पाकिस्तान के कंबर जिले में जन्मे अचलवंशी ने बचपन में ही माता-पिता को खो दिया, लेकिन कठिन परिस्थितियों के बावजूद सेवा और संघर्ष की राह चुनी। आजादी के बाद वे जैसलमेर आए और समाज के निर्धन, वंचित तथा अनुसूचित वर्ग के लोगों को नि:शुल्क उपचार देने का संकल्प लिया। चिकित्सा को उन्होंने सेवा का माध्यम बनाया और इसे अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया।

नगरपालिका अध्यक्ष भी रहे

वर्ष 1954 में वे नगरपालिका अध्यक्ष निर्वाचित हुए और 30 वर्षों तक पार्षद पद पर रहते हुए नगर के विकास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। राजस्थान स्वायत शासन संस्था में मृत्युपर्यंत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर रहते हुए उन्होंने राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद और प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू सहित कई राष्ट्रीय नेताओं से मुलाकात की।

"वह हर किसी के काम आने का जज़्बा रखने वाले इंसान थे। उनके दरवाजे हमेशा खुले रहते थे।"

मनोहरलाल अचलवंशी, पुत्र