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फिर शुरू हो जाएगा तबादलों का खेल,लेकिन विकास कब होगा ?

लोकसभा चुनाव के लिए लागू की गई आदर्श आचार संहिता की अवधि रविवार को समाप्त हो गई। इसके साथ ही सीमावर्ती जैसलमेर जिले में रुके हुए विकास कार्यों को फिर से गति मिलने की उम्मीद जगी है, वहीं सरकारी अधिकारी और कार्मिक अब लोगों के किसी कार्य को आचार संहिता की आड़ में लटका नहीं सकेंगे।
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फिर शुरू हो जाएगा तबादलों का खेल,लेकिन विकास कब होगा ?

जैसलमेर. लोकसभा चुनाव के लिए लागू की गई आदर्श आचार संहिता की अवधि रविवार को समाप्त हो गई। इसके साथ ही सीमावर्ती जैसलमेर जिले में रुके हुए विकास कार्यों को फिर से गति मिलने की उम्मीद जगी है, वहीं सरकारी अधिकारी और कार्मिक अब लोगों के किसी कार्य को आचार संहिता की आड़ में लटका नहीं सकेंगे। गत ढाई महीनों के दौरान सरकारी दफ्तरों में ‘आचार संहिता लागू है’ कहकर कई महत्वपूर्ण कार्यों को टाले जाने की प्रवृत्ति बेतहाशा देखने में आ रही थी। ऐसे ही जिले में एक बार फिर प्रशासन, पुलिस और अन्य विभागों में अधिकारियों के तबादलों का दौर शुरू होने की पूरी उम्मीद है। कई अधिकारी ऐसे हैं, जिन्हें यहां से मनचाहे स्थान पर तबादला करवाना है तो अनेक अधिकारियों को सत्ताधारी पार्टी के जनप्रतिनिधि और संगठन के पदाधिकारी यहां नहीं रखना चाहते। ऐसे में एक बार फिर से भीषण गर्मी में ‘तबादला मानसून’ छा सकता है।
अटके रहे करोड़ों के कार्य
जिले में गत 10 मार्च से आदर्श आचार संहिता लागू होने पर कई करोड़ के विकास कार्य अटक गए थे। अब इन कार्यों की फाइलें आगे चलेंगी। इस दौरान कई कार्यों के टेंडर निरस्त किए गए तो कई कार्यों के कार्यादेश अधर में लटक गए। जैसलमेर शहरी क्षेत्र में राजस्थान सरकार के नगरपरिषद से लेकर शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में जलदाय, सार्वजनिक निर्माण विभाग, पंचायतीराज, विद्युत आदि महकमों के साथ केंद्र सरकार के महकमों के विकास और जनसुविधाओं से जुड़े कार्य इस दौरान विलम्बित हुए हैं।
तो क्या नपेंगे कई अधिकारी
जिले के सत्ताधारी जनप्रतिनिधि आचार संहिता की अवधि पूरा होने का शिद्दत से कर रहे थे। दरअसल, कई अधिकारियों का स्थानांतरण जिले से करवाने के लिए वे मन बना चुके हैं। आचार संहिता की वजह से उनके हाथ बंधे हुए थे। इनमें प्रशासनिक और पुलिस से लेकर विभागीय अधिकारी शामिल हैं, वहीं दूसरी तरफ ऐसे अधिकारी भी हैं जो स्वयं यहां रहना नहीं चाहते। जिले के जनप्रतिनिधियों के सामने खास तौर पर चिकित्सकों सहित इंजीनियरों के रिक्त पदों पर नियुक्तियां करवाने और वर्तमान में कार्यरत चिकित्सकों को यहां रोके रखने की बड़ी चुनौती है।
ज्यादा नहीं है समय
वैसे, लोकसभा आम चुनाव के कुछ महीनों बाद नवम्बर माह में स्थानीय निकाय चुनाव प्रस्तावित है। इसके लिए राज्य का स्वायत्त शासन विभाग कवायद शुरू भी कर चुका है। तब शहरी क्षेत्र में विकास कार्य रुक जाएंगे और चुनावी कार्य में लगे अधिकारियों व कार्मिकों को भी छेड़ा नहीं जा सकेगा। ऐसे ही अगले साल फरवरी में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के लिए फिर से आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी।

फैक्ट फाइल -
- 10 मार्च को लगी थी आचार संहिता
- 02 स्थानीय निकाय जैसलमेर जिले में
- 140 ग्राम पंचायतें यहां कार्यरत