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पीएम की जयपुर सभा को लेकर अफसरों के छूट रहे पसीने,आखिर ऐसा क्यों? जानिए पूरी खबर

-सभा में लाभार्थियों को ले जाने की मशक्कत -7 जुलाई को जयपुर आएंगे पीएम मोदी

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जैसलमेर. वैसे तो सरकारी लक्ष्यों की ‘पूर्ति’ करने में अफसर माहिर समझे जाते हैं और किसी न किसी ढंग से वे योजनाओं के लक्ष् यों को ‘हासिल’ कर ही लेते हैं, लेकिन इस बार बात जरा अलग है। दरअसल, आगामी 7 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रदेश की राजधानी जयपुर में एक सभा लेने वाले हैं। जिसमें वे सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से मुखातिब होंगे। इस सभा में लाभार्थियों को ले जाने के लिए विभागीय अधिकारियों को लक्ष्य आबंटित किए जा चुके हैं और अब इन लक्ष्यों को पूरा करने में उन्हें पसीना बहाना पड़ रहा है। राज्य सरकार से लेकर जिला प्रषासन की प्राथमिकताओं में अभी प्रधानमंत्री की जयपुर यात्रा सबसे ऊपर है। प्रशासन के स्तर पर बैठकों का दौर चल रहा है। जैसलमेर से 6 जुलाई को लाभार्थी जयपुर के लिए रवाना होंगे और 7 तारीख को वहां कार्यक्रम में सम्मिलित होने के बाद लौटेंगे।

छूट गया खाना-पीना
प्रधानमंत्री की सभा में केंद्र की तीन और राज्य सरकार की नौ अलग-अलग कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को जैसलमेर से ले जाया जाना है। जैसलमेर जिले को दो हजार लाभार्थियों को उक्त सभा में शामिल करवाने का लक्ष्य मिला है। इस दो हजार के लक्ष्य को विभागाधिकारियों में बांट दिया गया है। अब संबंधित अधिकारी तथा कार्मिक दिन-रात लाभार्थियों से सम्पर्क कर उन्हें जयपुर चलने के लिए मना रहे हैं। कार्मिकों को फील्ड में भेजा गया है।वे लाभार्थियों के शहर, गांव और ढाणियों में आए घरों व झोपडिय़ों तक में दस्तक दे रहे हैं। उन्हें जयपुर चलने के लिए मना रहे हैं। दिक्कत आने पर अथवा नकारात्मक जवाब मिलने पर लाभार्थियों की अपने अधिकारियों से बात करवाते हैं। जानकारी के मुताबिक जिन विभागों को लक्ष्य मिले हैं, उनके पास अभी केवल यही काम है। इस कार्य में उनके पसीने छूट रहे हैं। लाभार्थियों को ले जाने का जिम्मा मुख्य तौर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला रसद अधिकारी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, नगरपरिषद, पंचायत समितियों को मिला है।

पहली-पहली बार
आम तौर पर राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों व पदाधिकारियों को प्रदेष अथवा देश की राजधानी में आयोजित होने वाली रैलियों-प्रदर्शनों आदि में कार्यकर्ताओं को ले जाने के लिए लक्ष्य मिला करते हैं। वे किसी तरह जोड़-तोड़ से लोगों को तैयार कर ले जाते भी हैं, लेकिन यह पहली बार है कि सरकारी तंत्र को इस तरह का कार्य मिला है। अधिकारियों व कार्मिकों को इस तरह लोगों को बसों में बैठा कर ले जाने और पुन:घर तक लाने की व्यवस्था करने का कोई अनुभव नहीं है। वे एक दूसरे से पूछताछ कर आगे बढ़ रहे हैं। सरकार से जो निर्देश मिले हैं, उनके अनुसार जैसलमेर से जयपुर तक बसों की व्यवस्था प्रशासन करेगा। इस यात्रा में लाभार्थियों के खाने-पीने का इंतजाम कौन करेगा, यह अभी साफ नहीं है। इसके अलावा करीब 600 किलोमीटर दूर जयपुर तक लाभार्थियों जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, को सुरक्षित ढंग से लाने-ले जाने का जिम्मा संबंधित विभागों का होगा। ग्रामीण क्षेत्र से महिलाओं को जयपुर चलने के लिए मनाना कतई आसान नहीं है। उनके परिजन व वे स्वयं इसके लिए तैयार नहीं बताई जाती।

फैक्ट फाइल -
-2000 लाभार्थियों को ले जाने का लक्ष्य मिला जैसलमेर को
- 06 जुलाई को जयपुर के लिए रवाना होंगी बसें
-09 योजनाओं के लाभार्थी जाएंगे जयपुर

करेंगे पूरा प्रयास
प्रधानमंत्री की सभा में 2 हजार लाभार्थियों को जिले से ले जाने के लिए जिला प्रशासन व संबंधित विभाग पूरी तरह से प्रयासरत हैं। आगामी 4 तारीख को प्रभारी मंत्री रिव्यू बैठक लेंगे, जिसमें लक्ष्यों के बारे में चर्चा की जाएगी। फिलहाल यह कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता पर है।
-अनुपमा जोरवाल, जिला कलक्टर, जैसलमेर