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तेज हवा में खिसकते धोरे बने बाधा,पूरा नहीं हुआ सरहद सील का इरादा

- वर्ष 2018 तक भारत-पाकिस्तान सीमाओं को सील करने का दो साल पहले जताया गया था संकल् प- तूफान या तेज अंधड़ में सहज नहीं है पौधों का पेड़ों के रूप में बढऩा - शाहगढ़ बल्ज क्षेत्र में शिफ्टिंग सेंड ड्यून्स की समस्या से निजात पाना बना चुनौती
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jaisalmer

तेज हवा में खिसकते धोरे बने बाधा,पूरा नहीं हुआ सरहद सील का इरादा

जैसलमेर. राजस्थान सहित देश के चार राज्यों में करीब 2300 किलोमीटर (नियंत्रण रेखा को छोडकऱ) लम्बी पाकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा को सील करने का दो साल पहले जताया गया इरादा पूरा नहीं हो सका है। आज भी जैसलमेर जिले के शाहगढ़ बल्ज क्षेत्र में शिफ्टिंग सेंड ड्यून्स की समस्या सीमा सुरक्षा के लिहाज से चुनौती बनी हुई है। गौरतलब है कि आज से दो साल पहले जैसलमेर में ही केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने दिसम्बर 2018 तक सीसुब परिसर में बॉर्डर स्टेट्स के गृहमंत्रियों व आला अधिकारियों के साथ बैठक कर पाकिस्तान से लगती भारतीय सीमाओं को पूरी तरह से सील करने का फैसला लिया था और इसके लिए बाकायदा बॉर्डर सिक्योरिटी ग्रिड बनाकर समयबद्ध निगरानी व्यवस्था कायम करने की बात कही थी। गृहमंत्री की घोषणा के लिहाज से सीमा सील करने के लिए तय समयावधि में अब महज दो माह का समय शेष बचा है।
यहां होनी है असल परीक्षा
केंद्र सरकार ने 2018 तक सीमाओं को सील करने का जो लक्ष्य निर्धारित किया था, उसकी असल परीक्षा देश के अन्य सीमाई प्रांतों के साथ जगह बदलने वाले रेतीले धोरों के लिए पहचान रखने वाले जैसलमेर जिले के पाकिस्तान सीमा से सटे शाहगढ़ बल्ज क्षेत्र में ही है। हालांकि सीमा सुरक्षा बल की ओर से पिछले कुछ अर्से के दौरान शाहगढ़ क्षेत्र में हजारों की संख्या में पौधे लगाने का काम तेजी से करवाया जा रहा है, लेकिन इस इलाके में गर्मियों के मौसम में चलने वाले तूफानी अंधड़ में इन पौधों का पेड़ों के रूप में सतत बढऩा सवालों के घेरे में है। दूसरा, इन पेड़ों के अलावा अन्य तकनीकी उपायों को अभी तक इस क्षेत्र में अमल में लाया जाना बाकी है।
...शांति के कारण उपेक्षित
- शाहगढ़ बल्ज क्षेत्र में अंधड़ के दौरान 50 से 150 फीट की ऊंचाई तक धोरों के चलते तारबंदी झूल जाती है। लेकिन सीमा पर शांति के कारण केंद्र सरकार का अपेक्षित ध्यान इस तरफ नहीं जा पाया है।
- पिछले कुछ अर्से के दौरान केंद्र सरकार और उसके गृह मंत्रालय का ज्यादातर ध्यान पाकिस्तान से सटी जम्मू-कश्मीर तथा पंजाब सीमा पर ही केंद्रित रहा है।
- जानकारों के अनुसार वहां आए दिन सीमापार से होने वाली घुसपैठ और फायरिंग के कारण केंद्र सरकार ने दोनों राज्यों से सटी पाकिस्तान सीमा को सील करने में संसाधन झोंके हैं।
- लम्बे अर्से तक इस क्षेत्र में धोरों के जगह बदलने से तारबंदी के उसके नीचे आ जाने की समस्या का स्थायी समाधान ढूंढऩे से जुड़े प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय में गति नहीं पकड़ पाए।
- हालांकि सीमा सुरक्षा बल के साथ ही इस क्षेत्र में काम करने वाले संगठन सीमाजन कल्याण समिति की ओर से इस संबंध में कवायद की गई है।
18 बटालियन के जिम्मे सुरक्षा
जैसलमेर सीमा सुरक्षा बल के दक्षिण सेक्टर के अंतर्गत आने वाले शाहगढ़ बल्ज क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा 18 बटालियन संभाले हुए है। इस क्षेत्र में बल की करीब 20 सीमा चौकियां आई हुई हैं। बल के महानिरीक्षक अनिल पालीवाल ने यहां पौधरोपण कार्य तेजी से करवाने के लिए काजरी, जोधपुर के सहयोग से सभी चौकियों पर रोपित करने के लिए विभिन्न प्रजातियों विशेषकर वन औषधियों वाले पौधे मुहैया करवाए हैं।

नहर क्षेत्र में मिली थी सफलता
जैसलमेर जिले के इंदिरा गांधी नहर के खालों को रेत से पटने से बचाने के लिए आज से तीन दशक पहले नहर के दोनों ओर सघन पौधरोपण किए जाने से सकारात्मक परिणाम हासिल हुए थे। उसी तर्ज पर शाहगढ़ बल्ज क्षेत्र में रेत के टिब्बों को स्थिरता प्रदान करने के लिए अधिकाधिक संख्या में पेड़ लगाए जाने का निर्णय लिया गया।

यह है हकीकत
गौरतलब है कि गर्मियों में चलने वाले अंधड़ के कारण शाहगढ़ क्षेत्र में धोरों के सरकने और उनके ऊंचे होने से वहां की गई सिंगल फेंसिंग रेत के नीचे छिप जाती है। इसके साथ वहां 10 मीटर की गहराई और इतनी ही ऊंचाई में लोहे के एंगल पर लगाए जाने वाले रिफ्लेक्टर तक रेत के नीचे दब जाते हैं। सीमा प्रहरी फिर अपने अस्थायी साधनों से और अनुभव के आधार पर सीमा की रखवाली करते हैं। यहां फ्लड लाइट सहित अत्याधुनिक तकनीकी संसाधनों की व्यवस्था होनी अभी बाकी है।

फैक्ट फाइल -
-32 किमी लम्बा शाहगढ़ बल्ज का शिफ्टिंग सेंड ड्यून्स क्षेत्र
- 472 किमी लम्बी अंतरराष्ट्रीय सीमा पाक से सटे जैसलमेर जिले में
-150 फीट तक ऊंचे हो जाते हैं सरहदी क्षेत्र में रेत के टीले

कर रहे प्रयास
शाहगढ़ बल्ज क्षेत्र में शिफ्टिंग सेंड ड्यून्स की समस्या का समाधान करने के प्रयास चल रहे हैं। इसके तहत पौधरोपण बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। साथ ही नवीनतम तकनीकी उपाय भी अमल में लाए जाएंगे।
-एमएस राठौड़, उपमहानिरीक्षक, सीमा सुरक्षा बल फ्रंटियर, जोधपुर