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…तीन वर्ष बाद भी आस अधूरी, न जाने कब होगी पूरी ?

-नहीं हो पाया जैसलमेर-बीकानेर-जयपुर ट्रेन का ठहराव

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Jitendra Kumar Changani

Jun 23, 2017

pokaran

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पोकरण. जैसलमेर-बीकानेर-जयपुर व लम्बी दूरी की रेलों का ठहराव नहीं होने के कारण पोकरण रेलवे स्टेशन का अपेक्षित विकास नहीं हो पा रहा है। परमाणु परीक्षण के बाद सामरिक, ऐतिहासिक व धार्मिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण पोकरण कस्बा रेलवे प्रशासन की उदासीनता का शिकार है। आजादी से पूर्व निर्मित जिले का एकमात्र रेलवे स्टेशन आज भी विकास व सुविधाओं को तरस रहा है। यहां न तो पर्याप्त यात्री सुविधाओं का विस्तार हो पाया है और न ही इस क्षेत्र के लोगों की जैसलमेर-बीकानेर-जयपुर टे्रन के ठहराव की आस पूरी हो पाई है। इसके अलावा लम्बी दूरी की रेलें हावड़ा एक्सप्रेस, रानीखेत, बांद्रा टर्मिनस जैसी रेलों का भी पोकरण स्टेशन पर आवागमन नहीं हो रहा है तथा ये सभी रेलें पोकरण से बाईपास गोमट स्टेशन होकर निकल रही है।

सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण

क्षेत्र में यहां सेना व बीएसएफ की स्थाई छावनियों, पोकरण फिल्ड फायरिंग रेंज के कारण पोकरण सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण स्थानों में से एक है। भारतीय सेना व सीमा सुरक्षा बल का मुख्यालय स्थित होने के अलावा राष्ट्र को परमाणु संपन्न बनाने वाला शक्ति स्थल भी है। यहां बाबा रामदेव के गुरु बालीनाथ महाराज का आश्रम, बाबा रामदेव के इतिहास से जुड़ा धार्मिक पर्यटनस्थल होने के कारण यहां का धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व भी कम नहीं है। प्रतिवर्ष बाबा रामदेव के अंतरप्रांतीय भादवा मेले के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु बालीनाथ महाराज के आश्रम के दर्शन, पोकरण फोर्ट व बाबा रामदेव के इतिहास से जुड़े स्थलों को देखने के लिए आते है। पोकरण कस्बे के व्यापारी देश के मुंबई, पूना, बैंगलोर, चैन्नई, महाराष्ट्र व मध्यप्रदेश के कोने-कोने में बसे हुए है। ऐसे में लंबी दूरी की ट्रेनों से जोडऩे के लिए स्थानीय लोग जैसलमेर-बीकानेर-जयपुर, जैसलमेर-हावड़ा व जैसलमेर-बांद्रा टर्मिनस, जैसलमेर-रानीखेत ट्रेन के ठहराव की मांग करते रहे हैं, लेकिन केन्द्र में नई सरकार बनने के तीन वर्ष बाद भी स्थानीय लोगों की आस अधूरी पड़ी है।

वादा, जो न जाने कब होगा पूरा

गत आठ वर्ष पूर्व हुए 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन जोधपुर सांसद चंद्रेशकुमारी की ओर से जैसलमेर-बीकानेर ट्रेन के ठहराव का वादा किया गया था, लेकिन यह वादा पांच वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो सका। वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनावों के बाद केन्द्र में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत के साथ भाजपा की सरकार बनी तथा जोधपुर लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के ही गजेन्द्रसिंह शेखावत सांसद निर्वाचित हुए। उनके समक्ष भी स्थानीय लोगों की ओर से भी कई बार जैसलमेर-बीकानेर-जयपुर रेल के पोकरण ठहराव की मांग की गई। जिस पर उनकी ओर से बार-बार भरोसा भी दिलाया गया कि उनकी ओर से प्रयास किए जा रहे है, लेकिन उनके भी सांसद निर्वाचन के तीन वर्ष बाद भी आज तक पोकरणवासियों की यह आस पूरी नहीं हो सकी है तथा आज भी जैसलमेर-बीकानेर-जयपुर रेल रामदेवरा से सीधे बाईपास होकर निकल रही है तथा स्थानीय रेलवे स्टेशन पर उसका आवागमन शुरू नहीं किया गया है।

अन्य रेलें भी नहीं आती पोकरण

जैसलमेर-बीकानेर-जयपुर रेल के अलावा रेल मंत्रालय की ओर से जैसलमेर को लम्बी दूरी की रेलों से जोडऩे के लिए जैसलमेर-हावड़ा, जैसलमेर-बांद्रा टर्मिनस, जैसलमेर-रानीखेत ट्रेन रेलें शुरू की गई, लेकिन गत तीन वर्षों से ये रेलें भी पोकरण रेलवे स्टेशन को बाईपास करते हुए वाया रामदेवरा-जैसलमेर होकर आवागमन कर रही है। जिसके चलते इन रेलों का शक्तिस्थल पोकरण के लोगों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्थानीय लोगों, सेना व बीएसएफ के जवानों, पोकरण आने वाले श्रद्धालुओं को 13 किमी दूर रामदेवरा स्टेशन जाकर रेल से यात्रा करनी पड़ रही है। गौरतलब है कि पोकरण रेलवे स्टेशन देश की आजादी से पूर्व स्थापित किया गया था। उस रेलवे स्टेशन को लम्बी दूरी की रेलों से महरूम करना क्षेत्र के लोगों के साथ भेदभाव व अन्याय है।