पर्यटन सीजन खत्म होने से हजारों लोग बेरोजगार,दर्शनीय स्थलों पर पसरने लगा सन्नाटा

सीजन के साथ रोजगार ‘ऑफ’

By: Deepak Vyas

Published: 04 Apr 2019, 05:40 PM IST

जैसलमेर. पर्यटन को भले ही बिना चिमनी का उद्योग कहा जाए, लेकिन यह भी सच है कि इसमें जुटे लोगों को प्रतिवर्ष गर्मी के मौसम में छिपी हुई बेरोजगारी का सामना करना पड़ता है। जैसलमेर में गर्मी बढऩे के साथ पर्यटन सीजन के ‘ऑफ’ होने के चलते पर्यटन संबंधी प्रतिष्ठानों में काम कर रहे हजारों कार्मिकों से उनका रोजगार छिनने लगा है। इनमें जैसलमेर स्थित होटलों, रेस्टोरेंट्स, गाइडिंग, हैंडीक्राफ्ट, ट्रेवल एजेंसियों आदि से लेकर सम-खुहड़ी के रिसोर्ट्स के कामगार व ऊंट चालक आदि शामिल हैं। जैसलमेर में विगत वर्षों के दौरान वीकेंड ट्यूरिज्म के प्रचलन में आने के बावजूद इस व्यवसाय में कम से कम तीन महीनों के लिए छिपी हुई बेरोजगारी का दंश झेलना लोगों के लिए मजबूरी बना हुआ है। पर्यटन के स्थापित व्यवसायी तो फिर भी सीजन ऑफ का झटका झेल लेते हैं, लेकिन अधिकांश गाइड, वाहन चालक, कामगार आदि बुरी तरह से व्यथित दिखाई देते हैं।

फ्लाइट बंद होने से भी कमी
जैसलमेर के लिए दिल्ली और मुम्बई से विमान सेवा बंद करने के स्पाइसजेट के फैसले का भी जैसलमेर पर्यटन पर विपरीत असर पड़ा है। पर्यटन सीजन के दौरान इन दोनों महानगरों से बड़ी संख्या में देशी-विदेशी सैलानी विमान सेवा के माध्यम से सुगमतापूर्वक जैसलमेर पहुंचे थे। देश के सीमांत शहर तक पहुंचने में लगने वाले समय में कमी आने से सैलानी बढ़े थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। गौरतलब है कि मार्च के मध्य से जैसलमेर-दिल्ली और आखिर से जैसलमेर-मुम्बई विमान सेवा स्थगित कर दी गई।
पसरने लगा सन्नाटा
अप्रेल माह शुरू होने के साथ जैसलमेर शहर सहित सेंड ड्यून्स पर सन्नाटे की स्थितियां बनने लगी हैं। यहां से सैलानियों की रौनक में खासी कमी आई है। सोनार दुर्ग, गड़ीसर सरोवर, पटवा हवेलियों आदि दर्शनीय स्थलों से लेकर सम और खुहड़ी के सेंडड्यून्स पर गिनती के सैलानी नजर आते हैं। शनिवार-रविवार अथवा अन्य किसी अवकाश के दिन उनकी आवक अवश्य बढ़ जाती है। हालांकि पर्यटन सीजन के चरम काल में नजर आने वाली सैलानियों की रेलमपेल के आगे यह कुछ भी नहीं है।
सम में कम हुई रौनक
सैलानियों की पहली पसंद सम सेंड ड्यून्स पर सायंकाल में गिने-चुने सैलानी ही वीकेंड को छोडक़र अब नजर आते हैं। यही कारण है कि वहां रौनक सिमट गई है तथा लगभग ९० रिसोर्ट्स में से अब १० से १५ ही संचालित हो रहे हैं। बाकी रिसोर्ट आगामी जुलाई-अगस्त माह से शुरू हो पाएंगे। दरअसल एक तो सैलानियों की कम आवक और उस पर गर्मी में आंधी-तूफान की आशंका के कारण रिसोर्ट्स संचालक उन्हें समेटने में ही भलाई समझते हैं। अभी जो रिसोर्ट्स चल भी रहे हैं, उनमें काम करने वालों की छंटनी होना शुरू हो गई है। वहां के ऊंट चालकों के लिए भी मुश्किलें बढ़ गई हैं।

फैक्ट फाइल -
- 70 प्रतिशत तक सैलानियों की आवक में कमी
- 08 महीने माना जाता है पर्यटन सीजन
- 02 फ्लाइट्स बंद की गई मार्च में

गर्मियों में पर्यटन बढ़ाने के हो प्रयास
जैसलमेर में गर्मी के दौरान पर्यटकों की संख्या में एकदम से कमी आ जाने के कारण इस क्षेत्र से जुड़े लोगों के रोजगार पर विपरीत असर पड़ता है। यह वाकई बहुत विकट समस्या है। ऐसे में गर्मियों में सैलानियों को आकर्षित करने के ठोस प्रयास करने होंगे।
- पुष्पेंद्र कुमार व्यास, रिसोर्ट संचालक

Deepak Vyas Bureau Incharge
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