4 सितंबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

पुरखों का हुनर दिला रहा पहचान, पर्यटकों की भी पसंद

पुरखों के हुनर ने न इन्हें पहचान दिलाई, बल्कि पर्यटन नगरी में सैलानियों को रिझाने का भी अवसर दिया।
2 min read
Google source verification
Rajneesh Vaishnav's painting art getting fame

पुरखों का हुनर दिला रहा पहचान, पर्यटकों की भी पसंद

जैसलमेर. पुरखों के हुनर ने न इन्हें पहचान दिलाई, बल्कि पर्यटन नगरी में सैलानियों को रिझाने का भी अवसर दिया। विश्व पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान बना चुके हुनरमंद कलाकारों में कई लोग ऐसे है, जो बाहर से आकर यहां बस गए। यहां उनकी कला को कद्रदान मिले और उनकी प्रतिभा की अनूठी छाप अब विदेशों तक सैलानियों के माध्यम से बन चुकी है। पर्यटन व्यवसाय से जुडकऱ अपनी कला को विदेशों तक पहुंचाने में इन कलाकारों को काफी मदद मिली है। पेन्टिंग कला से जुड़े रजनीश वैष्णव बचपन से ही चित्र उकेरने में रुचि रखते हैं। रजनीश वैष्णव को स्थानीय लोग बाबू भाई के नाम से जानते है। उनके दादा व पिता भी इसी कला से जुड़े थे। रजनीश ने अपने पिता से ये कला सीखी है। वे चित्रकला में कई प्रकार की पेंटिंग बनाते है और कई कलाओं का समिश्रण है। वे मिनेचर पेंटिंग, पिछवाई, मार्डन आर्ट व ट्रेडिशनल पेंटिंग बनाते है। इस कला में कपड़ो व कागज दोनो में ही चित्र उकेरे जाते है। कपड़ो व टी शर्ट में विभिन्न प्रकार के चित्र फेबरिक कलर से बनाते है, जैसे राजस्थानी वेष भूषा में महिला पुरुष, उंट, देवी देवताओं, किसी व्यक्ति का चेहरा आदि बनाते है। कई बार ग्राहको की डिमाण्ड के अनुसार भी पेंटिंग बनाकर देते है। साधारणतया कई टी-शर्ट पर पेंटिंग बनाते है, जिसे विदेशी पर्यटक बड़े चाव से खरीदते है। इन पर चित्र उकेरने के दौरान प्रयोग में लिया जाने वाला फेबरिक रंग धोने से खराब नहीं होते है। इसके अलावा फ्लोरसेंट कलर से तैयार की जाने वाली पेटिंग रात्रि में लाइट के साथ चमक उठती है।

16 वर्ष बाद सडक़ का हुआ नवीनीकरण
डाबला. जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत बडोड़ा गांव के राजस्व गांव आशायच के बाशिंदों का सडक़ मार्ग के नवीनीकण का इंतजार करीब 16 वर्ष बाद पूरा हुआ है। गौरतलब है कि सडक़ मार्ग क्षतिग्रस्त होने व इसके कारण राहगीरों को आ रही दिक्कतों के संबंध में राजस्थान पत्रिका की ओर से बार-बार समाचार प्रकाशित किए गए। अब ग्रामीणों को राहत मिली है। इस मार्ग पर कंकरीट निकलने से आवागमन करने पर असुविधा हो रही थी। ग्रामीणों ने कई बार विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अवगत करवाया था। पहले जहां ग्रेफ रोड से आशायच पहुंचने में आधा घंटा लगता था, अब गांव से इस दूरी को तय करने में महज 5 से 7 मिनट का समय लगता है।