
लाठी में स्थित क्षेत्रीय वन अधिकारी कार्यालय।
लाठी. लाठी वन क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण संसाधनों की गंभीर कमी सामने आई है। करीब 200 किलोमीटर में फैले इस विशाल वनक्षेत्र में गश्त और वन्यजीव रेस्क्यू के लिए वन विभाग के पास केवल एक मोटरसाइकिल है। संसाधनों की कमी के कारण घायल या बीमार वन्यजीवों तक कई बार समय पर पहुंचना संभव नहीं हो पाता। ऐसे मामलों में प्राथमिक उपचार मिलने से पहले ही कई वन्यजीव दम तोड़ देते हैं। क्षेत्रीय वन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, लाठी रेंज की सीमा राष्ट्रीय राजमार्ग-11 पर थईयात से शुरू होकर चाचा गांव तक फैली है।
इसी तरह देवीकोट से बालाना तक भी विस्तृत वनक्षेत्र शामिल है। इस रेंज में लाठी, धोलिया, भादरिया, खेतोलाई, चांधन, गंगाराम की ढाणी, चाचा, चांदनी, सनावड़ा, केरालिया, महेशों की ढाणी, रतन की बस्सी, लोहटा, मदासर, मूलाना, रासला, देवीकोट, भागू का गांव, देगराय ओरण, बडोड़ा, भैरवा, धायसर, डेलासर, जावंध, बासनपीर, रिदवा, भोजासर, काणोद, करमा की ढाणी, सोढ़ाकोर, सांवला, झाबरा और भोजका सहित दर्जनों गांव आते हैं।
उक्त वन क्षेत्र चिंकारा, हिरण, दुर्लभ प्रजाति के गिद्ध तथा सैकड़ों अन्य वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। दुर्घटना, बीमारी या अन्य कारणों से वन्यजीव घायल होने की सूचना मिलने पर सीमित संसाधनों के कारण रेस्क्यू टीम कई बार तय समय में मौके तक नहीं पहुंच पाती। इससे वन्यजीवों के बचाव की संभावना कम हो जाती है। वन विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि रेस्क्यू वाहन की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिल सकी।
ऐसे में कई अवसरों पर स्थानीय वन्यजीव प्रेमियों और स्वयंसेवकों के सहयोग से निजी वाहनों की व्यवस्था कर घायल वन्यजीवों को उपचार के लिए पहुंचाया जाता है। वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों का मानना है कि इतने बड़े वनक्षेत्र के लिए समर्पित रेस्क्यू वाहन, अतिरिक्त गश्ती संसाधन और पर्याप्त स्टाफ की व्यवस्था जरूरी है। स्थायी संसाधन उपलब्ध होने पर न केवल रेस्क्यू की गति बढ़ेगी, बल्कि वन्यजीवों की मृत्यु दर में भी कमी लाई जा सकेगी।
Updated on:
05 Aug 2026 08:04 pm
Published on:
05 Aug 2026 08:04 pm
