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एक बार फिर रात के अंधेरे में रोशनी से जगमगा उठा सोनार किला

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एक बार फिर रात के अंधेरे में रोशनी से जगमगा उठा सोनार किला

जैसलमेर। सोनार किला एक बार फिर रात के अंधेरे में जगमगा उठा। पिछले महीनों से बिजली का भुगतान बकाया होने के चलते डिस्कॉम ने सोनार दुर्ग के इर्द-गिर्द लगी फ्लड लाइटों का कनेक्शन विच्छेद कर दिया था। जिला कलक्टर ओम कसेरा ने पर्यटन सीजन की शुरुआत के मद्देनजर डिस्कॉम और नगरपरिषद के अधिकारियों से समझाइश कर जारी गतिरोध को समाप्त करवाया। नगरपरिषद ने इसके बाद पांच लाख रुपए का चैक डिस्कॉम को जारी कर दिया। जिसके बाद शनिवार सायं सोनार दुर्ग रोशनी से नहा उठा। इस पर पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों में खुशी है। वहीं स्वर्णनगरी भ्रमण पर आए सैलानी भी रोमांचित हुए।

ऐसे चला घटनाक्रम
जानकारी के अनुसार, डिस्कॉम सोनार दुर्ग की लाइटों का कनेक्शन फिर से बहाल करने के लिए 26 लाख रुपए का बिल अदा करने पर अड़ा हुआ था, जबकि नगरपरिषद प्रशासन बिल को बहुत बढ़ा-चढ़ा बताते हुए इस राशि को जमा करवाने में असमर्थता जता रहा था। जिला कलक्टर कसेरा ने पर्यटन सीजन के शुरुआती दौर में रात के समय अंधेरे में डूबे सोनार दुर्ग के कारण पर्यटन पर पडऩे वाले विपरीत असर को भांपते हुए डिस्कॉम के उच्चाधिकारियों से बातचीत की। साथ ही नगरपरिषद के जिम्मेदारों से भी समझाइश की। इसका नतीजा यह निकला कि परिषद ने पांच लाख रुपए का चैक जमा करवा दिया और डिस्कॉम भी बकाया 26 लाख रुपए के बिल की आवश्यक जांच के लिए तैयार हो गया। फिलहाल डिस्कॉम ने दुर्ग की लाइटों का कनेक्शन भी बहाल कर दिया। परिषद आयुक्त झब्बरसिंह चौहान ने बताया कि जिला कलक्टर के प्रयासों की बदौलत और स्वर्णनगरी की पहचान सोनार दुर्ग के सौन्दर्य को फिर से रोशन करने की कवायद के चलते डिस्कॉम को चैक दिया गया है।

11 मार्च से कटा था कनेक्शन
सोनार दुर्ग की फ्लड लाइटों का 26 लाख रुपए बकाया होने पर डिस्कॉम ने इस वर्ष 11 मार्च को कार्रवाई करते हुए दुर्ग की फ्लड लाइटों के साथ पर्यटक स्वागत केंद्र और जैसलमेर नगरपरिषद कार्यालय का विद्युत संबंध भी विच्छेद कर दिया था। उसके बाद डिस्कॉम के साथ नगरपरिषद के संबंधों में खासा खिंचाव आ गया। नगरपरिषद कार्यालय का विद्युत संबंध तो चार दिन बाद बहाल हो गया। वहीं पर्यटक स्वागत केंद्र का कनेक्शन तो महीनों से कटा ही रहा है। वैसे सोनार दुर्ग की लाइटों का बकाया बिल अदा करने के लिए पर्यटन विभाग भी बीते समय से हरकत में आया हुआ है। यह और बात है कि नगरपरिषद और पर्यटन विभाग दोनों सोनार दुर्ग की लाइटों का बकाया अधिकतम 10 लाख रुपए तक ही मानते हैं। उनके अनुसार डिस्कॉम की ओर से 26 लाख रुपए का जारी बिल वास्तविक उपभोग की तुलना में बहुत अधिक है।